तिलहेश्वर नाथ महादेव मंदिर में उमड़ेंगे श्रद्धालु, तैयारी पूरी

तिलहेश्वर नाथ महादेव मंदिर स्थानीय सांस्कृतिक एवं आस्था का केंद्र भी है: एसडीएम

-तिलहेश्वर नाथ महादेव मंदिर स्थानीय सांस्कृतिक एवं आस्था का केंद्र भी है: एसडीएम सुपौल. सावन माह की शुरुआत के साथ ही सुपौल जिले के ऐतिहासिक और आस्था के केंद्र तिलहेश्वर नाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है. जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर स्थित सुखपुर गांव में अवस्थित यह प्राचीन मंदिर शिवभक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुका है. इस वर्ष 11 जुलाई से 9 अगस्त तक चलने वाले सावन महीने के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए मंदिर विकास समिति और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं. पौराणिक मान्यता व ऐतिहासिक महत्व स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थान कभी घने जंगलों से आच्छादित था, जहां गायें चराई जाती थी. एक रहस्यमयी घटना में गायें एक निश्चित स्थान पर स्वयं दूध छोड़ने लगी. जब ग्रामीणों ने उस स्थान की खुदाई की, तो वहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ, जो आज मंदिर के गर्भगृह में भूमि तल से लगभग दस फीट नीचे स्थित है. स्थानीय लोग इसे टिलेश्वर, तिलेश्वर या तिलकेश्वर के नाम से भी जानते हैं. यह मंदिर एक ऊंचे टीले पर स्थित था, जिससे इसका नाम ””टिलेश्वर”” पड़ा, जो कालांतर में ””तिलहेश्वर”” हो गया. श्रद्धालुओं की सुविधा के पुख्ता इंतजाम मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष ने बताया कि परिसर की पूरी तरह साफ-सफाई कर ली गई है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग बनाए गए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके. जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के विशेष प्रबंध किए गए हैं. मंदिर के समीप वाहनों की पार्किंग पर रोक लगा दी गई है. इसके लिए एक किलोमीटर दूर पार्किंग स्थल निर्धारित किया गया है, जहां से श्रद्धालु पैदल मंदिर तक पहुंच सकेंगे. प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को यातायात संचालन में लगाया गया है. इसके अलावा सीसीटीवी, मजिस्ट्रेट, पुलिस बल, और महिला पुलिसकर्मियों की विशेष तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है. एसडीएम इंद्रवीर कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है. तिलहेश्वर नाथ महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है. स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाएं भी तैयार मंदिर परिसर और आस-पास के मार्गों पर डस्टबिन की व्यवस्था की गई है. साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक प्राथमिक उपचार केंद्र, एम्बुलेंस, डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है. तिलहेश्वर नाथ महादेव मंदिर अपनी पौराणिकता, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक महत्व के कारण धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है. यदि सरकार और पर्यटन विभाग ठोस कदम उठाएं, तो यह बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक बन सकता है. सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक का आयोजन इस स्थल को और अधिक पवित्र बना देता है. श्रद्धालुओं की भक्ति, समिति की तत्परता और प्रशासन की चुस्ती इस धार्मिक आयोजन को एक संगठित और श्रद्धापूर्ण रूप प्रदान करती है.

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