सुपौल के छातापुर के प्राचीन डीहवारिणी स्थान पर आस्था का महासंगम, फूलहाईस के बाद जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

छातापुर मुख्यालय बाजार स्थित प्राचीन डीहवारिणी स्थान पर आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर एक भव्य पुजनोत्सव का आयोजन किया गया. इस आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने लोकआस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता का संगम प्रस्तुत किया.

Supaul News: सुपौल जिले के छातापुर मुख्यालय बाजार स्थित प्राचीन ग्रामीण देवता माता डीहवारिणी स्थान पर बुधवार की रात आयोजित पुजनोत्सव श्रद्धा, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम बन गया. आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. जैसे ही पारंपरिक फूलहाईस की रस्म पूरी हुई, पूरा मंदिर परिसर माता डीहवारिणी के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए.

यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि छातापुर की लोकआस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया. स्थानीय लोगों के साथ-साथ राजस्थान और मुंबई से पहुंचे मारवाड़ी समाज के श्रद्धालुओं ने भी पूजा-अर्चना में भाग लेकर अपनी आस्था व्यक्त की.

आषाढ़ पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मुख्यालय बाजार स्थित प्राचीन डीहवारिणी स्थान पर बुधवार की रात भव्य पुजनोत्सव आयोजित किया गया. पंडित कुलानंद झा के सानिध्य में गर्भगृह के भीतर पुजेगरी प्रमोदचंद बोथरा ने विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई और पारंपरिक फूलहाईस की रस्म करवाई.

फूलहाईस होते ही श्रद्धालुओं ने माता डीहवारिणी के जयकारे लगाए और पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया. देर रात तक कीर्तन और भजन का सिलसिला चलता रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा.

महिलाओं की रही विशेष भागीदारी

पुजनोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूजा सामग्री लेकर माता के दरबार में उपस्थित होकर पूजा-अर्चना की. कई श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के साथ झांप भी चढ़ाया.

मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और स्थानीय लोगों के अनुसार यह आयोजन वर्षों से क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल रहा है.

राजस्थान और मुंबई से भी पहुंचे श्रद्धालु

आयोजन की एक विशेष बात यह रही कि राजस्थान और मुंबई जैसे दूरस्थ शहरों में रहने वाले छातापुर मूल के मारवाड़ी समाज के लोग भी हर वर्ष की तरह इस बार भी पुजनोत्सव में शामिल होने पहुंचे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने का माध्यम भी है. कई परिवार विशेष रूप से आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर छातापुर लौटकर माता डीहवारिणी के दर्शन करते हैं.

मनोकामना पूर्ण होने की प्राचीन मान्यता

आयोजन समिति के सदस्य राजेंद्र बहरखेर और अशोक भगत ने बताया कि डीहवारिणी स्थान प्राचीन काल से ग्रामीण देवता के रूप में पूजित है. स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ की गई प्रार्थना माता डीहवारिणी अवश्य स्वीकार करती हैं.

इसी विश्वास के कारण दूर-दराज और अन्य राज्यों में रहने वाले लोग भी हर वर्ष इस पुजनोत्सव में शामिल होने के लिए छातापुर पहुंचते हैं.

Supaul News: भंडारा और प्रसाद वितरण से पूर्ण हुआ आयोजन

पूजनोत्सव संपन्न होने के बाद साधु-संतों को भंडारा प्रसाद ग्रहण कराया गया. इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच खीर और बूंदिया का प्रसाद वितरित किया गया.

पूरे आयोजन में राजेंद्र बहरखेर, प्रमोदचंद बोथरा, गोपालजी भगत, प्रकाशचंद जैन, विजय भगत, उपेंद्र भगत, अनिल भगत, बिनोद भगत, नवरत्न जैन, पंकज कुमार भगत, राजीव रंजन, शशिभूषण पप्पू, सुरज चंद्र प्रकाश, चंदन राम, राजीव स्वर्णकार, पुनीत बोथरा, प्रमोद बहरखेर, राजकिशोर गोस्वामी, जगदीश मुखिया, संजय बहरखेर और शंभू साह सहित कई स्थानीय श्रद्धालु और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

By संजय कुमार पप्पू

संजय कुमार पप्पू प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. छातापुर (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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