एडीएम पर गैस संकट की मार, चूल्हे पर खाना बनाने को विवश रासोई

रसोइयों को मजबूरी में पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है

जदिया. सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना इन दिनों गैस संकट के कारण प्रभावित हो रही है. क्षेत्र के कई स्कूलों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से भोजन अब गैस चूल्हे के बजाय लकड़ी व जलावन के सहारे मिट्टी के चूल्हों पर बनाया जा रहा है. इससे व्यवस्था एक बार फिर पुराने दौर में लौटती नजर आ रही है. कई विद्यालयों में हफ्तों से गैस सिलेंडर नहीं पहुंचे हैं. ऐसे में रसोइयों को मजबूरी में पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है. धुएं के बीच खाना बनाना उनकी दिनचर्या बन गई है. जिससे आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. गैस की कमी का असर सीधे बच्चों पर पड़ रहा है. भोजन तैयार करने में अधिक समय लगने के कारण कई स्कूलों में बच्चों को देर से खाना मिल रहा है. वहीं कुछ स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर भी शिकायतें मिल रही हैं. इससे योजना के मूल उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और समय पर भोजन उपलब्ध कराना प्रभावित हो रहा है. शिक्षकों का कहना है कि गैस एजेंसियों की अनियमित आपूर्ति और बकाया भुगतान की समस्या के कारण यह स्थिति बनी है. समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से विद्यालय प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ रही है. इधर अभिभावकों ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि धुएं में बने भोजन से बच्चों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. उन्होंने प्रशासन से जल्द गैस आपूर्ति सुचारू कराने की मांग की है. कहा कि एमडीएम जैसी महत्वपूर्ण योजना के लिए नियमित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. कुल मिलाकर गैस संकट ने एमडीएम योजना की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कब तक कर पाता है.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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