मगरमच्छ का रेस्क्यू करती वन विभाग की टीम. | Prabhat Khabar Network

वीरपुर में सड़क पर घूमता दिखा आठ फीट का मगरमच्छ, एक घंटे के रेस्क्यू के बाद जाल में पकड़ा, कोसी नदी में छोड़ा

वीरपुर के बसंतपुर में सुबह-सुबह सड़क पर 8 फीट लंबा मगरमच्छ दिखने से अफरा-तफरी मच गई. वन विभाग और स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे पकड़ा और कोसी नदी में छोड़ा. जानिए पूरी घटना.

वीरपुर थाना क्षेत्र के बसंतपुर वार्ड नंबर 1 स्थित खोंटहा में मंगलवार की अहले सुबह सड़क पर करीब आठ फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई देने से हड़कंप मच गया. सुबह करीब साढ़े चार बजे स्थानीय लोगों की नजर सड़क पर घूम रहे मगरमच्छ पर पड़ी. इसके बाद लोगों ने आसपास के घरों में इसकी जानकारी दी और भीमनगर थाना व वन विभाग को सूचना दी.

सड़क पर मगरमच्छ देख मची अफरा-तफरी

मगरमच्छ दिखने की खबर फैलते ही सड़क पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. सूचना मिलते ही भीमनगर थानाध्यक्ष मनीष कुमार मौके पर पहुंचे. वहीं वीरपुर वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गयी. बड़े आकार का मगरमच्छ होने के कारण उसे पकड़ना आसान नहीं था.

बड़े जाल के लिए राघोपुर से मांगी गयी मदद

रेस्क्यू किया गया मगरमच्छ. | Prabhat Khabar Network

वन विभाग की टीम के पास इतने बड़े मगरमच्छ को पकड़ने के लिए उपयुक्त जाल नहीं था. इसके बाद राघोपुर स्थित वन विभाग कार्यालय से बड़ा जाल मंगाया गया. जाल पहुंचने के बाद वन विभाग के कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू अभियान शुरू किया.

एक घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ पकड़ा गया

वन विभाग की टीम और स्थानीय लोगों ने करीब एक घंटे तक मशक्कत की. काफी कोशिश के बाद मगरमच्छ को जाल में फंसा लिया गया. वन विभाग के कर्मियों के अनुसार मगरमच्छ करीब आठ फीट लंबा था. इसके आकार और ताकत को देखते हुए रेस्क्यू करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा.

जाल में बांधकर ट्रैक्टर से ले गये कोसी नदी

मगरमच्छ को पकड़ने के बाद जाल में सुरक्षित बांधा गया और ट्रैक्टर पर रखकर कोसी नदी ले जाया गया. इसके बाद उसे नदी में छोड़ दिया गया. रेस्क्यू के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए भीड़ लगी रही.

मगरमच्छ की फुफकार से सहमे लोग

मौके पर मौजूद ग्रामीण. | Prabhat Khabar Network

रेस्क्यू के दौरान मगरमच्छ की फुफकार सुनकर कई लोग हैरान रह गये. स्थानीय लोगों के बीच मगरमच्छ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी होती रहीं. कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने मगरमच्छ को लोमड़ी खाते हुए देखा था, जिसके कारण उसका वजन काफी बढ़ गया और वह तेज नहीं चल पा रहा था. हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है.

कुसहा त्रासदी के बाद बढ़ने की बात

वन विभाग के कर्मियों ने बताया कि वर्ष 2008 की कुसहा त्रासदी के बाद इस इलाके में मगरमच्छों की संख्या बढ़ने की बात सामने आती रही है. इसके चलते अब मगरमच्छ जलीय क्षेत्र से निकलकर आबादी और आवासीय इलाकों तक पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब-करीब हर महीने क्षेत्र में मगरमच्छ दिखने की सूचना मिल जाती है.

बच्चों और ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत

वन विभाग के अनुसार मगरमच्छ जंगली जीव है और इसके आसपास जाने में खतरा हो सकता है. ऐसे में नदी, तालाब और दूसरे जलजमाव वाले इलाकों के आसपास लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है. खासकर बच्चों को अकेले पानी वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने देने की सलाह दी गयी है.

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लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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