तत्कालीन डीएम सुनील वर्थवाल ने के स्थानांतरण के बाद उनकी योजना भी ठंडे बस्ते में चली गयी
सुपौल : जिला मुख्यालय के उत्तर व पश्चिमी भाग में सदियों से बहने वाली गजना नदी का वजूद समय के साथ मिटता जा रहा है़ इसकी मुख्य वजह जिला मुख्यालय बनने के बाद यहां की आबादी में हुई अपत्याशित वृद्धि मानी जाती है़ बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि पूर्व में यह नदी जब सुपौल के पूर्वोत्तर से दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में बहती थी,
तो नदी के विशाल रूप की वजह से इसे पार करने के लिए एकमात्र नाव का सहारा होता था़ पर, अब स्थिति यह है कि नदी के क्षेत्र में कई आलीशान घर व मकान का निर्माण हो रहा है़ हालांकि कुछ स्थानों पर गजना नदी का स्वरूप आज भी कायम है, लेकिन विशेष कर सुपौल उच्च माध्यमिक विद्यालय के पश्चिम व उत्तरी भाग में अंधाधुंध हुए निर्माण के कारण नदी का अस्तित्व पूरी तरह संकट में दिख रहा है़ पर्यावरण विदों की मानें, तो मानव समाज के विकास में नदी का अहम रोल है़
कहते हैं कि नदियां जीवन देती है़ं लिहाजा इन नदियों का अस्तित्व बनाये रखना बेहद जरूरी है़ स्थिति यह है कि बढ़ती आबादी व आधुनिकीकरण के दौर में समय रहते इन नदियों के प्रति समाज व सरकार संवेदनशील नहीं हुआ, तो कोसी क्षेत्र की कई नदियां गजना की भांति ही धीरे-धीरे लुप्त हो जायेंगी़
बनाना था पार्क व झील
गजना नदी के अस्तित्व को बचाने एवं इसे शहर का रमणीक स्थल बनाने को लेकर तत्कालीन डीएम सुनील वर्थवाल के कार्यकाल में काफी प्रयास किया गया था़ तत्कालीन डीएम श्री वर्थवाल ने मेला परिसर स्थित रेलवे पुल से लेकर बैरिया मंच रोड तक नदी के सौंदर्यीकरण की योजना बनायी थी़ इसके तहत नदी के दोनों ओर पक्की सीढ़ी व पक्के घाट के साथ ही नदी तट पर पार्क व झरने आदि बनाये जाने थे, ताकि न सिर्फ नदी उपयोगी बनी रहे,
बल्कि करीब दो किलोमीटर की दूरी में बने पार्क व झील का स्थानीय नागरिक लाभ उठा सकें. गौरतलब है कि शहर में आम लोगों को शाम गुजारने के लिए कोई भी उपयुक्त स्थान मौजूद नहीं है़
लिहाजा तत्कालीन डीएम की महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी से आम शहरियों में हर्ष का माहौल था़ दुर्भाग्य है कि डीएम श्री वर्थवाल के स्थानांतरण के बाद किसी ने भी उक्त परियोजना को पूर्ण करने के प्रति रुचि नहीं दिखायी. यही वजह है कि ऐतिहासिक गजना नदी का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुका है़
