सड़क पर वाहन, लगता है जाम

पार्किंग नहीं रहने की वजह से वाहन चालक सड़कों पर या सड़क किनारे यहां-वहां लगा देते हैं वाहन सुपौल : जिला बनने के 25 वर्ष बीत गये. इसके बावजूद जिला मुख्यालय की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जा सकी है. खास कर मुख्यालय में पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहने का खामियाजा वाहन चालक व शहरवासियों […]

पार्किंग नहीं रहने की वजह से वाहन चालक सड़कों पर या सड़क किनारे यहां-वहां लगा देते हैं वाहन

सुपौल : जिला बनने के 25 वर्ष बीत गये. इसके बावजूद जिला मुख्यालय की ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जा सकी है. खास कर मुख्यालय में पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहने का खामियाजा वाहन चालक व शहरवासियों को उठाना पड़ता है. आलम यह है कि पार्किंग नहीं रहने की वजह से वाहन चालक सड़कों पर या सड़क किनारे यहां-वहां वाहन लगा देते हैं.
इसके कारण अक्सर जाम की समस्या उत्पन्न होती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन व नगर परिषद पार्किंग की समुचित व्यवस्था कर न सिर्फ जाम की समस्या को खत्म कर सकता है, बल्कि इससे राजस्व की प्राप्ति भी हो सकती है.
चालक कहीं भी लगा देते हैं वाहन: जहां-तहां वाहन लगाने के कारण मुख्यालय स्थित बाजार में जाम की समस्या आम हो चुकी है. विशेष कर लोहिया नगर, स्टेशन चौक व महावीर चौक जैसे व्यस्त चौराहों पर जाम लगता ही रहता है. शहर में ट्रैफिक पुलिस की तैनाती भी अब तक नहीं की गयी है. नतीजा है कि बाइक व चार पहिया वाहन चालक अपने मन मरजी के मुताबिक कहीं भी वाहन लगा देते हैं.
बैंकों के आगे लगती है वाहनों की भीड़: जिला मुख्यालय में करीब एक दर्जन से अधिक बैंक शाखा हैं, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि किसी भी बैंक के पास वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. बैंक आने वाले ग्राहक सड़कों पर ही मजबूरन वाहन लगाते हैं. इसके कारण उक्त सड़क से गुजरने वालों को परेशानी होती है.
व्यवसायी भी हैं हलकान: शहर में पार्किंग की सुदृढ़ व्यवस्था नहीं होने का खमियाजा व्यवसायियों को भी उठाना पड़ता है. दुकानों के आगे लगे दर्जनों वाहनों की वजह से उनका व्यवसाय प्रभावित होता है. इस वजह से कई बार दुकानदार व वाहन चालकों के बीच झड़प की स्थिति उत्पन्न हो जाती है.
रिक्शा चालकों की भी है परेशानी: शहर में एक भी घोषित रिक्शा पड़ाव नहीं है. इसके कारण रिक्शा चालकों को सवारी के इंतजार में चौक-चौराहे व सड़कों के किनारे रिक्शा लगाना पड़ता है. यह दीगर बात है कि व्यवस्था में दोष की वजह से अक्सर इन गरीब रिक्शा चालकों को दुकानदारों व पुलिस बल की फटकार सुननी पड़ती है.

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