कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी
राशि निकासी के बावजूद कई प्रधानाध्यापकों ने नहीं पूरा किया भवन निमाण कार्य, पर कार्रवाई कुछ के ही विरुद्ध
सिमराही : भले ही शिक्षा विभाग भवन निर्माण की दिशा में एकाध विद्यालयों के प्रधान पर प्राथमिकी दर्ज कर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश में जुटा हो, लेकिन इस तरह के मामले में विभागीय लापरवाही को दरकिनार नहीं किया जा सकता.
कई ऐसे प्रधानाध्यापक हैं जिन्होंने राशि निकासी के बावजूद भवन निर्माण कार्य पूरा नहीं किया और अपना स्थानांतरण भी करा लिया. राघोपुर प्रखंड में ऐसे दर्जनों सरकारी विद्यालय हैं, जहां भवन निर्माण की संपूर्ण राशि के उठाव के बाद भी विद्यालय भवन अधूरा पड़ा है. ऐसी स्थिति में इक्के दुक्के विद्यालय के प्रधानों पर ही कारवाई होना केवल खानापूरी है. सूत्रों की मानें तो ऐसे प्रधानों के विरुद्ध राशि वसूलने की करवाई हो रही है. पर कई शिक्षकों ने अपना स्थानांतरण किसी अन्य विद्यालय में करा लिया है. कुछ शिक्षक ने कार्रवाई करने वाले पदाधिकारी से मिलीभगत कर ली है.
कार्रवाई के जद में आये विद्यालय: राघोपुर प्रखंड के एक दर्जन से अधिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां वर्षों पहले राशि का उठाव हो गया, पर भवन निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है. वहीं मध्य विद्यालय कोरिया पट्टी, प्राथमिक विद्यालय मुसहरी टोला कोरिया पट्टी, मध्य विद्यालय धरहरा महादेव स्थान, प्राथमिक विद्यालय छपकि टोला राम विशनपुर, प्राथमिक विद्यालय गोविन्द मंडल टोला फिंगलाश, उर्दू प्रावि गद्दी सहित दर्जन भर ऐसे विद्यालय हैं
जहां भवन निर्माण कार्य को पूर्ण नहीं कराया गया है. इसके बावजूद विभाग द्वारा केवल मध्य बिद्यालय कोरिया पट्टी के प्रधान के विरुद्ध ही प्राथमिकी दर्ज कराया गया है. सबसे रोचक बात यह है कि उक्त विद्यालय प्रधान पर प्राथमिकी तब हुई, जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक किशनदेव मंडल ने अपना स्थानांतरण अन्यत्र करवा लिया.
सूत्रों की माने तो एकाध विद्यालय के प्रधानाध्यापक और हैं जिन पर प्राथमिकी होनी है. आलम यह है कि कुछ विद्यालयों के भवन निर्माण की संपूर्ण राशि का उठाव तीन चार वर्ष पूर्व ही हो चुका है. उक्त कार्य पूरा करवाने का जिम्मा पूर्व के पदाधिकारियों के पास था. ऐसे में तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं.
प्राथमिकी दर्ज हुए विद्यालय का मामला : राघोपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि वर्ष 2006-07 में विद्यालय में 8 कमरे का वर्ग कक्ष बनाये जाने को लेकर सर्व शिक्षा से लगभग 16 लाख की राशि विद्यालय शिक्षा समिति के खाते में आयी थी.
उक्त राशि से मात्र चार कमरे का निर्माण कर राशि का गबन कर लिया गया. इतना ही नहीं प्रधानाध्यापक किशुन देव मंडल ने अपना स्थानांतरण गृह जिला नालंदा करवा लिया. कई वर्षों के बाद विभाग ने सिर्फ फरार प्रधानाध्यापक पर ही प्राथमिकी दर्ज करवायी.
