नदी में गाद के कारण बाढ़ की समस्या बनी रहती है
राघोपुर : कोसी नदी की बड़ी समस्या पानी के साथ आने वाला गाद है. गाद के कारण नदी की ऊंचाई काफी बढ़ चुका है. जिस कारण बाढ़ की समस्या बनी रहती है. तटबंध के बाहर के क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कई स्थानों पर जल जमाव की समस्या बनी रहती है. अगर पानी निकासी की व्यवस्था कर दी जाती है तो सिंचाई के लिये जल की समस्या उत्पन हो जाती है.
इन समस्याओं का समाधान खोजना होगा. यह कहना है सामाजिक , कृषि व आर्थिकी विशेषज्ञ भानु प्रकाश का. कोसी मास्टर प्लान के तहत लोक एकता मंच द्वारा प्रखंड के करजाईन मध्य विद्यालय में शनिवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के बाद वे सिमराही स्थित आयुरयोग रिसर्च फाउण्डेशन में प्रेस को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि ठहरे हुए जल का अनुकूलतम उपयोग सिंचाई के लिये किया जा सके ऐसी व्यवस्था किये जाने की जरूरत है. इससे नदियों में कम जल का प्रवाह होगा.
साथ ही पूर्व में निर्मित व अब निष्क्रिय हो चुकी जल निकासी संरचनाओं को भी पुनर्जीवित किये जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हर हाल में तट बंधों को रिसाव से मुक्त रखना होगा. गाद की समस्या समाधान के लिये तटबंध के बाहर कहीं मिट्टी भराई कार्य कराना हो तो कम से कम 60 से 70 प्रतिशत गाद का उपयोग करना अनिवार्य कर दिया जाय. जिस तरह जापान के लोगों ने भूकंप के साथ जीवन जीने की आदत को विकसित किया है उसी तरह क्षेत्र के लोगों को भी बाढ़ के साथ जीने की प्रवृति विकसित करनी होगी.
कोसी मास्टर प्लान का निर्माण कर रही अंतर्राष्ट्रीय कंपनी यूआरएस स्कॉट के सलाहकार ई सुरेश चंद्र सिन्हा ने कहा कि कोसी परियोजना को सफल कहा जा सकता है. कहा कि मास्टर प्लान में स्थानीय लोगों के सुझाव को समुचित स्थान दिया जाएगा. ताकि आपदा से प्रभावित हो रहे लोगों के दर्द का स्थायी समाधान करायी जा सके.
एजेंसी के ई विकास कुमार,पर्यावरण शास्त्री सीमा, लोक एकता मंच के कार्यपालक सयोजक सुरेश राय ने भी समस्या समाधान पर चर्चा किया. इस अवसर पर प्रेम नाथ भाइ आचार्य राम विलास मेहता, सत्य नारायण सहनोगिया,सूर्य नारायण मेहता आदि मौजूद थे.
