विभागीय शिथिलता से किसान लाभ से वंचित अनुदान की घोषणा होती है, पर वह भी समय से नहीं मिलताप्रतिनिधि, सुपौल कोसी इलाके के लोगों की आजीविका का साधन मुख्य तौर पर खेती को ही माना जाता रहा है. प्राकृतिक मौसम उपयुक्त रहने के कारण किसानों द्वारा अधिकांश खेतों में तीन फसल की पैदावार की जाती है. साथ ही किसान उक्त फसल को बेच कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करते रहे हैं. लेकिन इधर कुछ वर्षों से विभागीय शिथिलता के कारण किसानों को मुंह के खानी पड़ रही है. आलम यह है कि रबी मौसम को लगभग आधा समय बीतने को है. सरकार द्वारा घोषित डीजल अनुदान भी किसानों को उपलब्ध नहीं कराया गया है. साथ ही विभाग द्वारा समुचित मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जा सका है. इसे लेकर किसानों को फसल को समुचित मात्रा में खाद डाले जाने में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.कृषि विभाग है उदासीन जिले भर के किसानों को फसलों के पैदावार में परेशानी का सामना न करना पड़े. इसे लेकर सरकार द्वारा समय समय पर किसानों को अनुदानित दर पर खाद, बीज सहित फसल में उपयोग होने वाले अन्य सामग्रियों की उपलब्धता कराये जाने की भी घोषणा की जाती है. लेकिन क्षेत्र के किसान उक्त सभी लाभ से वंचित रह रहे हैं. इस कारण किसानों को खेती में अधिक लागत लगाना पड़ रहा है. यहां तक कि सरकारी निर्देशानुसार बीते धान के फसल में किसानों को पांच पटवन का डीजल अनुदान मिलना चाहिए था. लेकिन मात्र एक अनुदान ही प्राप्त हुआ है. विभागीय निष्क्रियता के कारण सरकार के आदेशानुसार मिलने वाले चार डीजल अनुदान स्थानीय विभाग का भेंट चढ़ गया. कमोबेश यही स्थिति रबी फसल की भी दिख रही है. रबी फसल में किसानों को बुआई के 22 दिन की अवधि पर पहली सिंचाई करना होता है. लेकिन उक्त सिंचाई का समय समाप्त हो चुका है. बावजूद इसके स्थानीय विभाग द्वारा किसानों को डीजल अनुदान का लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया है. खाद के बिक्री पर नहीं है नियंत्रण मालूम हो कि रबी फसल की खेती को लेकर किसानों को फसलों की बुआई के समय बीज के साथ कीटनाशक दवा उपलब्ध कराया गया था. जहां उक्त सामग्री को लेकर खेतों में फसल को लगाया है. जबकि गेंहू के फसल में पटवन के उपरांत यूरिया सहित अन्य खाद का उपयोग किये जाने की जानकारी दी जाती है. इसे लेकर सरकार द्वारा बाजार मूल्य पर खाद उपलब्ध कराया जाता है. जिसका नियंत्रण स्थानीय विभाग के अधीन रहता है. ताकि किसानों को ससमय खाद उपलब्ध हो सके. लेकिन स्थानीय विभाग का नियंत्रण नहीं होने के कारण किसानों को मूल्य से अधिक दर पर खाद खरीदने को विवश होना पड़ रहा है. किसानों का है दर्द किसानों ने बताया कि खेती की दिशा में स्थानीय विभाग द्वारा समुचित पहल नहीं किया जा रहा है. जिस कारण यहां के किसान खेती को अपनी विवशता मान रहे हैं. बताया कि विभाग द्वारा फसल में उपयोग किये जाने वाले खाद सामग्री का दर निर्धारित है. लेकिन स्थानीय विभाग द्वारा किस दर पर कौन सा खाद बाजार में उपलब्ध होगा. इसकी जानकारी नहीं दी जाती है. जिस कारण किसानों को खाद की खरीदारी में आर्थिक क्षति का नुकसान उठाना पड़ रहा है. बताया कि वर्तमान समय में बाजार में डीएपी 25 से 30 रुपये प्रति किलो, पोटाश 17 से 20 रुपये, यूरिया आठ से 10 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा है.कहते हैं पदाधिकारी मामले के बाबत डीएओ संत लाल साह ने बताया कि किसानों द्वारा दिये गये आवेदन के अनुरुप अनुदान की राशि मुहैया करायी गयी. साथ ही बाजार में उचित मूल्य पर खाद का पैकेट मिल रहा है.
विभागीय शिथिलता से किसान लाभ से वंचित
विभागीय शिथिलता से किसान लाभ से वंचित अनुदान की घोषणा होती है, पर वह भी समय से नहीं मिलताप्रतिनिधि, सुपौल कोसी इलाके के लोगों की आजीविका का साधन मुख्य तौर पर खेती को ही माना जाता रहा है. प्राकृतिक मौसम उपयुक्त रहने के कारण किसानों द्वारा अधिकांश खेतों में तीन फसल की पैदावार की जाती […]
