बिहार के कई जिलों में एयरपोर्ट बनाने और सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की तैयारी चल रही है. इसी बीच भागलपुर और आसपास के इलाकों में आई बाढ़ ने जमीन के कारोबार को बड़ा झटका दिया है. नाथनगर, सबौर, गोराडीह, शाहकुंड और सुल्तानगंज जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में पानी भरने से प्रॉपर्टी खरीदारों और निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.
जिन जमीनों को अब तक प्राइम लोकेशन बताकर लाखों-करोड़ों रुपये में बेचा जा रहा था, उनमें से कई जगहों पर अभी भी पानी जमा है. बाढ़ की इस स्थिति ने इन इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री और भविष्य में होने वाले विकास को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सुल्तानगंज एयरपोर्ट की जमीन भी पानी में
सबसे ज्यादा चर्चा सुल्तानगंज में प्रस्तावित अजगैवीनाथ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की जमीन को लेकर हो रही है. जिस इलाके में एयरपोर्ट बनाने की योजना है, वहां भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है. अब इस स्थिति ने प्रस्तावित एयरपोर्ट की जमीन को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
इस जमीन पर बड़े प्रोजेक्ट के प्रस्ताव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि बाढ़ की स्थिति का परियोजना पर क्या असर पड़ेगा. प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए सुल्तानगंज में जमीन चिह्नित किए जाने की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है.
विक्रमशिला सैटेलाइट टाउनशिप वाली जमीन पर भी सवाल
भागलपुर में प्रस्तावित विक्रमशिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के इलाके में भी बाढ़ का पानी पहुंचने से चिंता बढ़ी है. इस योजना से जुड़े क्षेत्र में पहले से ही अनियोजित विकास और जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर योजना बनाने की जरूरत बताई जाती रही है. सरकार ने इस इलाके में मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, भूमि विकास और भवन निर्माण पर रोक भी लगाई है.
निवेशकों का भरोसा हुआ कमजोर
बाढ़ की तस्वीरों ने स्थानीय और बाहरी जमीन खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है. जिन इलाकों को भविष्य में तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र बताया जा रहा था, वहां पानी का यह रूप देखकर निवेशक अब पैसा लगाने से पहले सोच रहे हैं. इस स्थिति का असर जमीन की नई डील पर पड़ सकता है.
एडवांस देने वाले भी सौदे से पीछे हटने लगे
जिन लोगों ने जमीन खरीदने के लिए टोकन मनी या एडवांस दे दिया था, उनमें भी अब कुछ लोग सौदा रद्द कर रकम वापस मांग रहे हैं. अगर निवेशकों के पीछे हटने का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर बिल्डरों और जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है. इससे प्रॉपर्टी बाजार में मंदी की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है.
बिना प्लानिंग की प्लॉटिंग पर उठे सवाल
बाढ़ ने उन इलाकों में हो रही प्लॉटिंग के तरीके पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि कई जगह बिना पर्याप्त टाउन प्लानिंग, जल निकासी और जरूरी ऊंचाई की व्यवस्था के जमीन को प्लॉट में बांटकर बेचा जा रहा है.
अब बाढ़ के पानी ने इन इलाकों की जमीनी स्थिति सामने ला दी है. ऐसे में भविष्य में जमीन के विकास से पहले ड्रेनेज और बाढ़ जैसी स्थितियों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है.
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प्राधिकरण बनने के बाद उठ सकता है मुद्दा
अधिकारी के मुताबिक फिलहाल संबंधित प्राधिकरण का गठन होना बाकी है. प्राधिकरण बनने के बाद उसकी बैठक में इस पूरे मुद्दे को गंभीरता से रखा जाना चाहिए. अधिकारी का कहना है कि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान दिया गया तो भविष्य में आने वाली परेशानियों का समाधान पहले से किया जा सकता है.
