Success Story पटना के फुलवारी निवासी संजय कुमार की कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपना कारोबार खड़ा करने का सपना देखते हैं. महज नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले संजय ने आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ दी. परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं तो उन्होंने नौकरी की तलाश के बजाय स्वरोजगार का रास्ता चुना. शुरुआत अचार बनाकर घर-घर बेचने से की. धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और आज वे नमकीन व अचार का उत्पादन कर रहे हैं.
अचार से शुरू हुआ कारोबार
संजय ने अलग-अलग सरकारी आयोजनों में अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए. यहां उन्हें ग्राहकों की पसंद और बाजार की मांग को समझने का मौका मिला. इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि नमकीन जैसे खाद्य उत्पादों की भी अच्छी मांग है. इसके बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार करने का फैसला लिया. परिवार ने भी इस काम में उनका साथ दिया.
हालांकि, नमकीन का उत्पादन शुरू करने के लिए पूंजी और मशीनों की जरूरत थी. इसी दौरान उन्होंने यूको बैंक की खगौल शाखा में अपने कारोबार का प्रस्ताव रखा. बैंक प्रबंधन की ओर से उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की जानकारी दी गयी. इसके बाद उद्योग विभाग से जुड़े संसाधन सेवी संतोष कुमार से संपर्क हुआ.
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10 लाख रुपये का ऋण मिलने से मिली कारोबार को रफ्तार
उद्योग विभाग के प्रतिनिधियों और PMFME योजना से जुड़े संसाधन सेवी की मदद से संजय को नमकीन का उद्यम शुरू करने के लिए बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण मिला. इस वित्तीय सहायता के बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार किया. फिलहाल उनके उद्यम में विभिन्न तरह के नमकीन और अचार तैयार किये जाते हैं.
संजय का कहना है कि उनका उद्देश्य ग्राहकों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है. कारोबार के साथ-साथ वे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं.
चार महिलाओं समेत पांच लोगों को दे रहे रोजगार
संजय के उद्यम में फिलहाल पांच लोग काम कर रहे हैं. इनमें चार महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं. उन्हें KVIC, MSME और PMFME के तहत आयोजित विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला है. इन आयोजनों के दौरान उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं.
अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की तैयारी
संजय अब अपने उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना चाहते हैं. इसके लिए वे अपने लघु उद्योग को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता हासिल करने की तैयारी में हैं. उनका लक्ष्य आने वाले समय में 100 से अधिक लोगों को रोजगार देना है.
संजय कहते हैं कि मुश्किलों से घबराने के बजाय लगातार प्रयास करते रहना चाहिए. नयी चीजें सीखने और कुछ अलग करने की इच्छा व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करती है. उनका प्रयास ऐसा कारोबार खड़ा करना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके.
संजय की यात्रा यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और सही अवसर के सहारे स्वरोजगार को आगे बढ़ाया जा सकता है. सरकारी योजनाओं से मिलने वाली वित्तीय और तकनीकी सहायता छोटे कारोबार को विस्तार देने में भी मदद कर सकती है.
