Vishva Hindu Parishad Foundation Day: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को शहर के भगवान पैलेस में कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें परिषद की 62 वर्षों की कार्ययात्रा, संगठन के उद्देश्य, सेवा गतिविधियों और हिंदू समाज के समक्ष मौजूद वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गयी.
वक्ताओं ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद की स्थापना वर्ष 1964 में हिंदू समाज को संगठित करने, जीवन मूल्यों एवं संस्कृति के संरक्षण तथा सेवा, समरसता और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई थी. कार्यक्रम में परिषद की स्थापना से अब तक की महत्वपूर्ण गतिविधियों और अभियानों का उल्लेख किया गया.
महत्वपूर्ण अभियानों और कार्यों का किया गया उल्लेख
वक्ताओं ने वर्ष 1966 में प्रयागराज में आयोजित प्रथम विश्व हिंदू सम्मेलन, वर्ष 1969 के उडुपी हिंदू सम्मेलन, वर्ष 1979 में प्रयागराज में आयोजित द्वितीय विश्व हिंदू सम्मेलन तथा वर्ष 1983 की एकात्मता यात्रा को संगठन की कार्ययात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव बताया.
उन्होंने कहा कि परिषद की ओर से गिरिवासी एवं वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, चिकित्सा और सेवा के विभिन्न प्रकल्प चलाये जा रहे हैं. इसके अलावा गौसेवा एवं गौ रक्षा, धर्म-संस्कृति संरक्षण, मठ-मंदिरों एवं तीर्थों की प्रतिष्ठा, संस्कृत एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा सामाजिक समरसता के लिए भी कार्य किये जा रहे हैं.
श्रीरामजन्मभूमि से जुड़े लंबे संघर्ष और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का भी परिषद की ऐतिहासिक कार्ययात्रा के संदर्भ में उल्लेख किया गया.
सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों पर जतायी चिंता
कार्यक्रम में हिंदू समाज के समक्ष मौजूद सामाजिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों पर भी चिंता जतायी गयी. वक्ताओं ने संस्कारों के क्षरण, युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, जनसंख्या असंतुलन, धार्मिक-सांस्कृतिक चुनौतियों और सामाजिक विघटनकारी प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता बतायी.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए संगठनात्मक एकजुटता, सामाजिक समरसता, सेवा और जनजागरण पर जोर दिया गया.
गांव-गांव तक संगठन मजबूत करने का लिया संकल्प
इस अवसर पर संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने और सेवा कार्यों को व्यापक बनाने का संकल्प लिया गया. कार्यक्रम में उत्तर बिहार प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत सह मंत्री विकास भारती, प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख ब्रह्मचारी, रविंद्र नाथ पाठक, रितेश, बसंत, जिला प्रचारक इंद्रजीत, रंजन, धनंजय, प्रमोद, आयुष सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का समापन समाज सेवा, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्रहित के कार्यों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ.
