Siwan News : झमाझम बारिश से खिले किसानों के चेहरे, 32 फीसदी पहुंची रोपनी की रफ्तार

पिछले दो दिनों से हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आयी है. कुछ दिनों से बीच-बीच में हो रही बूंदाबांदी ने अब रफ्तार पकड़ ली है. बारिश ने धान की रोपनी करने के लिए व्याकुल किसानों को काफी राहत दी है.

सीवान. पिछले दो दिनों से हुई झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे पर रौनक लौट आयी है. कुछ दिनों से बीच-बीच में हो रही बूंदाबांदी ने अब रफ्तार पकड़ ली है. बारिश ने धान की रोपनी करने के लिए व्याकुल किसानों को काफी राहत दी है. आसमान में उमड़ते काले बादलों से झमाझम हुई बारिश के बाद कई दिनों की तपिश और उमस भरी गर्मी से जहां राहत मिली है. वहीं, धान की रोपनी करने वाले किसानों के चेहरे पर भी मुस्कुराहट लौट आयी है. किसानों को बारिश का साथ मिलने से धान की रोपनी में तेजी आ गयी है. जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक लक्ष्य के विरुद्ध करीब 32 फीसदी खरीफ फसल का आच्छादन हो गया है. यदि इसी रफ्तार से बारिश का साथ मिला तो निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक धान की रोपनी सम्पन्न होगी. अगर तीन-चार दिनों तक और मौसम का साथ किसानों को मिला, तो धान की रोपनी का आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा. किसानों ने बताया कि धान के बिचड़े तैयार हो गए थे, लेकिन खेतों में पानी नहीं रहने के कारण धान की रोपनी में तेजी नहीं आ रही थी. थोड़े बहुत किसानों ने मोटर पंप की सहायता से रोपनी की थी.

धान की फसल को मिली संजीवनी :

जो किसान अपने संसाधनों से धान रोपनी कर चुके थे, वे बारिश नहीं होने से चिंतित थे. अनियमित बारिश की वजह से धान की फसल को नियमित रूप से सिंचाई नहीं हो पा रही थी जिस वजह से धान सहित अन्य खरीफ फसलों के पौधे मुरझा रहे थे. झमाझम बारिश से धान की फसल को नया जीवन मिला है. कुछ दिन कड़ाके की हुई धूप और उमस भरी गर्मी के कारण धान की फसल में रोग व खर पतवार पनपने लगा था, जिसके कारण फसल की तनें पीले पड़कर सूखने लगी थीं. जैसे ही मौसम में ठंडक आयी, वर्षा की बौछारें फसल पर पड़ीं वह रोग स्वतः समाप्त होने लगा है, जिससे किसानों ने राहत महसूस की. किसान केदारनाथ गिरि सहित अन्य लोगों ने बताया कि उमस के कारण फसल पर अन्य मौसमी रोग प्रभावी हो रहे थे, उससे भी अब निजात मिल जायेगी. पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में पड़ रही तीखी धूप और उमस भरी गर्मी के कारण आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ था. इस बारिश से राहत मिली है.

लक्ष्य से पिछड़ गयी थी खेती :

जिला कृषि पदाधिकारी डॉ आलोक कुमार ने बताया कि जिले में धान की खेती का लक्ष्य एक लाख 214 हेक्टेयर का है. बारिश कम होने की वजह से लक्ष्य का करीब 32 प्रतिशत ही पूरा किया जा सका है. अभी तक मात्र 31 हजार 350 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपनी हुई है. बताया कि बारिश से धान की रोपनी को रफ्तार मिलेगी. उम्मीद की जा रही है कि लक्ष्य के अनुसार धान की रोपनी होगी.

बारिश से सड़कों पर भरा पानी :

बारिश होने से इधर कुछ दिनों से पड़ रही गर्मी से लोगों को राहत मिली है. साथ ही खरीफ की प्रमुख फसल धान की फसल के लिए यह बारिश उपयोगी है. वहीं इस बारिश ने लोगों के जनजीवन को अस्तत-व्यस्त कर दिया है. बारिश के कारण कई सड़कें कीचड़मय व जलमग्न दिखी. जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसी समस्या उत्पन्न होती है. जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सड़क पर जलजमाव से लोग परेशान हैं. कहने को तो क्षेत्रों में पक्की सड़कों का जाल बिछा है लेकिन कई सड़कें पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं. सड़कों से गिट्टी निकल जाने के बाद सड़कों पर छोटे-बड़े गड्ढे बन चुके हैं. जिस कारण बारिश होते ही इन गड्ढे में जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है. दूसरी तरफ सड़कों पर धूल, मिट्टी और गिट्टी के छोटे-छोटे टुकड़े रहने से बारिश में सड़कों पर कीचड़ पसर जाता है. इसके बाद राहगीरों को पैदल चलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अधिकांश सड़कों के किनारे नाला का निर्माण किया गया है, पर आउटलेट सही नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर ही कई-कई दिनों से जमा रह जाता है. कई नालों में सही ढंग से निकासी नहीं होने के कारण बारिश होते ही उल्टे नाले की गाद सड़कों पर पसर जाता है, जिसके बाद उन सड़कों पर बारिश के बाद पैदल चलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन सड़कों पर लोगों के साथ ही दिन भर आला अधिकारियों का आवागमन रहता है, लेकिन किसी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं जाता है. रखरखाव के अभाव के कारण सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं.

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