siwan news : डेढ़ वर्ष बाद भी दोहरा हत्याकांड का खुलासा नहीं

siwan news : बड़हरिया थाना क्षेत्र के बाबू हाता गांव के समीप बीते 27 दिसंबर, 2023 की देर रात बदमाशों ने मांझागढ़ थाने के सिपहा खास गांव निवासी शैलेश कुमार शर्मा उर्फ अनीश और इसी गांव की निकहत परवीन की गोली मारकर हत्या कर दी थी

सीवान. बड़हरिया थाना क्षेत्र के बाबू हाता गांव के समीप बीते 27 दिसंबर, 2023 की देर रात बदमाशों ने मांझागढ़ थाने के सिपहा खास गांव निवासी शैलेश कुमार शर्मा उर्फ अनीश और इसी गांव की निकहत परवीन की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इसके बाद दोनों के शव को सड़क किनारे फेंक दिया था. इस हत्याकांड का डेढ़ वर्ष बीतने जा रहा है, लेकिन अब तक खुलासा नहीं हो सका है. बताते चलें की शैलेश सीवान में किसी चिकित्सक के यहां कंपाउंडर का काम करता था. वहीं, निकहत परवीन प्रसव बाद सीवान में अस्पताल में भर्ती अपनी बहन से मिलने पहुंची थी, जहां से 27 दिसंबर की शाम दोनों एक ही बाइक पर सवार होकर अपने घर के लिए निकले थे. इसी बीच बड़हरिया गोपालगंज रोड में बदमाशों ने बाबूहाता गांव के समीप सुनसान जगह पर पहुंचते ही दोनों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गयी. हालांकि स्थानीय थाना और एसआइटी के बावजूद भी अब तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है और न ही घटना का खुलासा हुआ है.

अंधेरे में हाथ-पैर मार रही पुलिस

इधर दोनों की हत्या के बाद परिजनों के साथ-साथ बाबू हाता गांव के लोग भी अपराधियों की गिरफ्तारी की राह देख रहे हैं. अब लोगों का पुलिस से भरोसा टूट चुका है. क्योंकि जो पुलिस डेढ़ वर्षों में अपराधियों की पहचान तक नहीं कर सकी वह अब क्या करेगी. हालांकि बड़हरिया पुलिस अब भी अपराधियों को गिरफ्तार कर लेने का दावा कर रही है.

एसपी भी बदले, थानाध्यक्ष भी बदले, पर नहीं हुआ वारदात का खुलासा

बताया जाता है कि 27 दिसंबर की घटना के बाद कई पुलिस पदाधिकारी बदले गये, जिसमें एसपी व बड़हरिया थानाध्यक्ष भी शामिल हैं, लेकिन मामले का खुलासा नहीं हो पाया है. अब लोगों का कहना है कि जब एसपी ही इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, तो पुलिसकर्मी गंभीरता से क्या लेंगे.

एसपी के निर्देश को भी नहीं मान रहे थानाध्यक्ष

बताते चलें कि क्राइम कंट्रोल को लेकर प्रत्येक महीने जिले के सभी थानाध्यक्षों के साथ एसपी क्राइम मीटिंग करते हैं, जहां एसपी अमितेश कुमार द्वारा थानाध्यक्षों को 300 दिनों एवं उससे ज्यादा समय से लंबित कांडों के निष्पादन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया है. लेकिन, थानाध्यक्ष निर्देशों को नहीं मान रहे हैं और 300 दिन तो दूर, डेढ़ वर्ष पूर्व के मामले का खुलासा नहीं कर पा रहे हैं.

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Published by: Shailesh kumar

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