सीवान में बिहार राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के विरोध में शिक्षकों की बैठक, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने की उठी मांग

सीवान जिले के विभिन्न कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

सीवान: बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन विधेयक के विरोध में बुधवार को जिले के विभिन्न अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई. बैठक में प्रस्तावित संशोधन को उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने तथा सभी हितधारकों से व्यापक विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की मांग की गई.

बैठक की अध्यक्षता विद्या भवन महिला कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीबी सिंह ने की, जबकि मंच संचालन राजा सिंह कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार सिंह एवं डीएवी कॉलेज सीवान शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. धनंजय यादव ने संयुक्त रूप से किया.

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर जताई चिंता

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के तहत अंगीभूत स्नातक महाविद्यालयों को उनके मूल विश्वविद्यालयों से अलग कर उच्च शिक्षा विभाग के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में लाने की योजना है. इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और वर्षों से विकसित शैक्षणिक व्यवस्था कमजोर पड़ जाएगी.

शिक्षकों ने कहा कि अंगीभूत महाविद्यालय केवल प्रशासनिक इकाइयां नहीं हैं, बल्कि विश्वविद्यालय प्रणाली का अभिन्न हिस्सा हैं. पाठ्यक्रम निर्माण, परीक्षा, मूल्यांकन, शोध, स्नातकोत्तर शिक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण जैसी सभी शैक्षणिक गतिविधियां विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के समन्वित ढांचे पर आधारित हैं.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के विपरीत बताया प्रस्ताव

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) की मूल भावना के भी विपरीत है. नीति में विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्त, बहुविषयक एवं नवाचार आधारित संस्थानों के रूप में विकसित करने पर बल दिया गया है. ऐसे में यह संशोधन उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है.

शिक्षकों की सेवा संरचना पर पड़ सकता है असर

शिक्षकों ने आशंका जताई कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर शिक्षकों के स्थानांतरण, कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस), शोध गतिविधियों, यूजीसी मानकों, एनएएसी प्रत्यायन तथा गुणवत्ता आश्वासन जैसी व्यवस्थाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विभागों और अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति समान प्रक्रिया से होती है. ऐसे में समान योग्यता वाले शिक्षकों के लिए अलग-अलग सेवा संरचना लागू करना संवैधानिक प्रश्न भी खड़ा करता है.

व्यापक परामर्श के बाद ही निर्णय लेने की मांग

बैठक में शिक्षक समुदाय ने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित विधेयक पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कुलपतियों, शिक्षक संगठनों, शिक्षा विशेषज्ञों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों तथा अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाए. साथ ही विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को अक्षुण्ण रखने की अपील की गई.

कई महाविद्यालयों के शिक्षक रहे मौजूद

बैठक में डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजा सिंह कॉलेज, विद्या भवन महिला महाविद्यालय, नारायण महाविद्यालय गोरियाकोठी, आरबीजीआर महाविद्यालय महाराजगंज, हरेराम महाविद्यालय मैरवा सहित जिले के विभिन्न अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी उपस्थित रहे. सभी प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संयुक्त एवं लोकतांत्रिक संघर्ष का संकल्प लिया.

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Author: Manish giri

Published by: Vivek Ranjan

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