Siwan News (उमा शंकर) : हसनपुरा प्रखंड के पकड़ी पंचायत के शेखपुरवा स्थित मां सिद्धेश्वरी हनुमत मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को श्री धाम वृंदावन धाम से पधारी प्रसिद्ध कथावाचक अर्चनामणि पराशर ने शिव विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. कहा कि सनातन परंपरा में श्रीराम कथा के पूर्व शिव कथा सुनाने की विशेष परंपरा रही है. इसका कारण यह है कि भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक है. शिव-पार्वती विवाह के पश्चात ही श्रीराम कथा का शुभारंभ माना जाता है, इसलिए राम कथा में प्रवेश करने से पहले श्रोताओं को शिव तत्व का बोध कराया जाता है.
श्रद्धा और विश्वास के मिलन से जन्म लेती है सच्ची भक्ति : अर्चनामणि पराशर
उन्होंने कहा कि माता पार्वती श्रद्धा की साक्षात स्वरूप हैं, जबकि भगवान शिव विश्वास के प्रतीक हैं. मनुष्य के जीवन में जब श्रद्धा और विश्वास का मिलन होता है, तभी सच्ची भक्ति का जन्म होता है. बिना श्रद्धा और विश्वास के ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है. भक्ति का मार्ग केवल ज्ञान या कर्म से नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और दृढ़ विश्वास से प्रशस्त होता है. कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव स्वयं श्रीराम के अनन्य भक्त हैं. रामचरितमानस में भी गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए बताया है कि शिव कृपा के बिना श्रीराम भक्ति सहज रूप से प्राप्त नहीं होती.
शिव कृपा से खुलता है राम भक्ति का मार्ग, कथा में हुआ दिव्य प्रवचन
जो व्यक्ति भगवान शिव के चरणों में प्रेम रखता है, उनके प्रति समर्पण और आस्था रखता है, उसके हृदय में स्वतः श्रीराम के प्रति भक्ति जागृत हो जाती है. उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में श्रद्धा, विश्वास और भक्ति को स्थान दें. जब मन में शिव के प्रति प्रेम और विश्वास होगा, तभी भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होगी और जीवन सुख, शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होगा. वहीं इस महायज्ञ के आचार्य लक्ष्मी निधि मिश्र,सोमनाथ शुक्ल, रविरंजन मिश्र, मुन्ना, गोलू, मुकेश व जय शंकर के अलावे चितरंजन , पिंटू,जय मंगल, किरण, सत्येंद्र, रामनारायण, सचिन, छोटू व सांई झांकी मंडली के संचालक सत्यम सिंह उर्फ चिंटू सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे.
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