PHOTOS : सीवान : स्वत: प्रकट शिवलिंग से लेकर विशाल कमलदाह सरोवर तक, 10 तस्वीरों में देखें ऐतिहासिक महेंद्रनाथ मंदिर और घंटाघर की गाथा

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PHOTOS : सीवान : स्वत: प्रकट शिवलिंग से लेकर विशाल कमलदाह सरोवर तक, 10 तस्वीरों में देखें ऐतिहासिक महेंद्रनाथ मंदिर और घंटाघर की गाथा
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घंटा घर और महेंद्रनाथ मंदिर परिसर

Mahendranath Temple : सीवान का ऐतिहासिक महेंद्रनाथ मंदिर, जिसे मेहंदार धाम भी कहते हैं, अपनी अलौकिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. स्वयंभू शिवलिंग, चमत्कारी कमलदाह सरोवर और मन्नत पूरी होने पर बांधी जाने वाली घंटियों की अनूठी कथाओं को तस्वीरों के साथ जानें.

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महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) की तस्वीर

बिहार के सिवान जिले के सिसवन प्रखंड में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है, महेंद्रनाथ मंदिर. जिसे मेहंदार धाम के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर का निर्माण नेपाल के राजा महेंद्रवीर विक्रम सहदेव ने कराया था. महाशिवरात्रि और सावर के पावन महीने में यहां बिहार और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु जल चढ़ाने पहुंचते हैं.

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महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) की ड्रोन से ली गई तस्वीर

सावन माह में सीवान जिले के प्रसिद्ध महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. ड्रोन से ली गई यह तस्वीर मंदिर परिसर की भव्यता, विशाल परिसर और श्रद्धालुओं की आस्था को खूबसूरती से दर्शाती है. सावन की सोमवारी पर यहां सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और पूरा परिसर 'बोल बम' व 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठता है.

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महेंद्रनाथ मंदिर, घंटा घर की तस्वीर

महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) में स्थित घंटा घर को लेकर यह मुख्य मान्यता है कि यहाँ मन्नत पूरी होने पर श्रद्धा स्वरूप घंटी बांधने से बाबा महेंद्रनाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिसके कारण आज इस परिसर में भक्तों द्वारा चढ़ाई गई हजारों छोटी-बड़ी घंटियाँ लटकी हुई हैं. धार्मिक रूप से माना जाता है कि इन घंटियों की पवित्र ध्वनि से पूरे क्षेत्र की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और वातावरण में सकारात्मकता का संचार होता है, जिससे यह स्थल श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र बन गया है.

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कमलदाह सरोवर की तस्वीर

महेंद्रनाथ मंदिर के ठीक सामने 52 बीघे के विशाल क्षेत्र में फैला पवित्र कमलदाह सरोवर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है, जिसके बारे में पौराणिक मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने से कुष्ठ रोग और सभी प्रकार के चर्म रोगों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है. लोक कथाओं के अनुसार, नेपाल के राजा महेंद्रवीर विक्रम सहदेव जब इस क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब इसी सरोवर के पानी के स्पर्श से उनका असाध्य कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो गया था, जिसके बाद उन्होंने कृतज्ञता स्वरूप इस भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवाय. आज भी यहाँ आने वाले भक्त बाबा महेंद्रनाथ का जलाभिषेक करने से पहले इस पावन सरोवर में डुबकी लगाना बेहद शुभ और फलदायी मानते हैं.

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गर्भगृह में विराजमान भवगान शंकर की शिवलिंग

महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) के गर्भगृह में विराजमान भगवान शंकर के दिव्य शिवलिंग के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. सावन माह में यहां आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. भक्त विधि-विधान से जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ से सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं. गर्भगृह में गूंजते हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो उठता है.

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गर्भगृह में बाबा का विशेष श्रृंगार (सोशल मीडिया)

महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) के गर्भगृह में भगवान शिव का दिव्य शिवलिंग आकर्षक पुष्प सज्जा और रंग-बिरंगी रंगोली से अलंकृत नजर आ रहा है. सावन माह में विशेष श्रृंगार के साथ बाबा का पूजन-अर्चन किया जाता है, जहां श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं. मनमोहक सजावट और भक्तिमय वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आस्था से सराबोर कर देता है.

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फूलों से हुआ बाबा का श्रृंगार (सोशल मीडिया)

महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) के गर्भगृह में भगवान शिव के शिवलिंग का आकर्षक पुष्प श्रृंगार श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. गेंदा और अन्य रंग-बिरंगे फूलों से शिवलिंग को कलात्मक रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा गर्भगृह भक्तिमय और मनमोहक दिखाई देता है

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महेंद्रनाथ मंदिर परिसर

महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) का शांत और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को अनूठी आत्मिक अनुभूति कराता है. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही घंटियों की मधुर ध्वनि, भगवान शिव के जयघोष और मनमोहक स्थापत्य के बीच भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिलता है. सांझ की बेला में मंदिर की भव्यता और परिसर की शांति वातावरण को और भी दिव्य बना देती है. यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु कुछ पल सुकून और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हुए भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन हो जाता है.

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महेंद्रनाथ मंदिर स्थापित शिवलिंग

मेहंदार धाम में स्थापित शिवलिंग को लेकर यह गहरी धार्मिक मान्यता है कि यह कोई मानव-निर्मित प्रतिमा नहीं, बल्कि एक स्वयंभू शिवलिंग है जो सदियों पहले इस पावन भूमि पर स्वतः प्रकट हुआ था. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, नेपाल के राजा महेंद्रवीर विक्रम सहदेव को जब कमलदाह सरोवर के चमत्कारी जल से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली, तब उन्हें इसी दिव्य और स्वयंभू शिवलिंग के साक्षात दर्शन हुए थे. राजा ने इस प्रकट हुए शिवलिंग की पवित्रता और महत्ता को देखते हुए इसके चारों ओर मुख्य गर्भगृह का निर्माण कराया और एक भव्य मंदिर का ढांचा तैयार करवाया, जिसके कारण आज भी भक्त इस शिवलिंग को अत्यंत जाग्रत मानते हैं और यहाँ मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है.

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महेंद्रनाथ मंदिर परिसर में विराजमान नंदी

महेंद्रनाथ मंदिर (मेहंदार धाम) परिसर में विराजमान भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज की प्रतिमा श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है. मान्यता है कि नंदी के दर्शन और उनके कान में अपनी मनोकामना कहने से वह सीधे भगवान भोलेनाथ तक पहुंचती है. सावन माह में श्रद्धालु नंदी महाराज को बेलपत्र, पुष्प और अक्षत अर्पित कर सुख, समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं. मंदिर में विराजमान नंदी की भव्य प्रतिमा भक्तों को शिव भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का संदेश देती है.

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लेखक के बारे में

By साक्षी कुमारी

साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.

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