ड्रोन से बनाया जायेगा सीवान शहर का रोडमैप

ड्रोन और लेज़र सर्वे के माध्यम से आनेवाले समय के लिए सीवान शहर के विकास का रोडमैप तैयार होगा. ड्रोन के सहारे जमीन, सड़क, नाले, जलजमाव और तालाबों की साफ तस्वीर सामने आएगी. इसी सटीक जानकारी के आधार पर आगे सड़क, ड्रेनेज और शहर के समग्र विकास का व्यावहारिक रोडमैप तय किया जायेंगा.

विवेक सिंह, सीवान. ड्रोन और लेज़र सर्वे के माध्यम से आनेवाले समय के लिए सीवान शहर के विकास का रोडमैप तैयार होगा. ड्रोन के सहारे जमीन, सड़क, नाले, जलजमाव और तालाबों की साफ तस्वीर सामने आएगी. इसी सटीक जानकारी के आधार पर आगे सड़क, ड्रेनेज और शहर के समग्र विकास का व्यावहारिक रोडमैप तय किया जायेंगा. शहर के सुनियोजित और सुव्यवस्थित विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में नगर परिषद एक अहम कदम उठाने जा रही है.शहर के कुल 44 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अब ड्रोन और लेज़र तकनीक के माध्यम से विस्तृत हवाई सर्वे कराया जायेगा. इस आधुनिक सर्वे का उद्देश्य शहर की मौजूदा भौगोलिक और संरचनात्मक स्थिति को पूरी तरह समझना और उसी के आधार पर आगे की विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना है. नगर परिषद के अनुसार अब तक शहर के कई विकास कार्य पुराने नक्शों, सीमित जानकारी या अनुमान के आधार पर किए जाते रहे हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि कहीं जल जमाव की समस्या बनी रहती है तो कहीं सड़क और नाली की ऊँचाई सही न होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है. योजना अधिक प्रभावी ढंग से बनायी जा सकेगी ड्रोन और लेज़र सर्वे के बाद शहर का एक सटीक और डिजिटल नक्शा तैयार होगा. जिसमें जमीन की ऊंचाई ढाल, सड़कें, नालियां, भवन, खाली भूमि, तालाब और अन्य संरचनाएं साफ-साफ दिखाई देंगी.इस सर्वे का सबसे बड़ा लाभ ड्रेनेज और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने में होगा.बरसात के मौसम में शहर के कई इलाकों में जलजमाव आम समस्या है.सर्वे के जरिए यह स्पष्ट होगा कि पानी किस दिशा से बहता है, कहां रुकता है और किन स्थानों पर जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है. इसके आधार पर नालियों की नयी रूपरेखा तैयार की जाएगी और जरूरत के अनुसार सड़क व नाली की ऊंचाई तय की जाएगी, ताकि भविष्य में जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके.नगर परिषद का मानना है कि यह तकनीक सड़क नेटवर्क के विकास में भी काफी मददगार साबित होगी.शहर की मौजूदा सड़कों की चौड़ाई, स्थिति और कनेक्टिविटी का सही आकलन किया जा सकेगा. इससे नयी सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण और मरम्मत की योजना अधिक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेगी. जल संरक्षण से जुड़ी योजनाएं धरातल पर उतर सकेंगी- ड्रोन और लेज़र सर्वे से तालाबों, पोखरों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का रास्ता भी आसान होगा. कौन सा तालाब कितना फैला है, उसकी गहराई क्या है और किन जगहों पर अतिक्रमण हुआ है.यह सब जानकारी सामने आने से जल संरक्षण से जुड़ी योजनाएं धरातल पर उतर सकेंगी. इससे भूजल स्तर सुधारने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.इसके साथ ही यह सर्वे शहर की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने में सहायक होगा. पेयजल आपूर्ति, सीवरेज, विद्युत, सड़क, पार्क और अन्य जनसुविधाओं की योजना बनाते समय सटीक आंकड़े उपलब्ध रहेंगे.भविष्य में होने वाले शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए नगर परिषद को दीर्घकालीन विकास योजना बनाने में भी सुविधा होगी. क्या कहते है अधिकारी- ड्रोन और लेज़र तकनीक से किया जाने वाला यह सर्वे शहर के विकास की दिशा और दशा दोनों बदलने में सक्षम होगा. इससे योजनाएं अधिक पारदर्शी, टिकाऊ और जनहितकारी बनेंगी. आने वाले समय में सीवान को एक सुव्यवस्थित, आधुनिक और रहने योग्य शहर के रूप में विकसित करने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी डॉ विपिन कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी,नप सीवान ऐसे होता है ड्रोन सर्वे ड्रोन सर्वे के दौरान विशेष कैमरों से लैस ड्रोन को तय ऊंचाई पर उड़ाया जाता है. ड्रोन हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करता है. इससे सड़क, नाला, मकान, खाली जमीन, जल जमाव वाले इलाके, तालाब और अतिक्रमण की स्पष्ट जानकारी मिलती है. ड्रोन से जुटाया गया डाटा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के जरिए मैप में बदला जाता है. जिससे सही स्थिति सामने आती है.इससे बिना जमीन पर ज्यादा टीम उतारे कम समय में सटीक सर्वे संभव हो पाता है और विकास योजनाएं बनाने में आसानी होती है. ऐसे होता है लेजर सर्वे लेजर सर्वे यानी लिडार तकनीक में विशेष उपकरणों से लेजर बीम जमीन पर छोड़ी जाती है. यह बीम वापस लौटकर जमीन की ऊंचाई, गहराई और ढलान की सटीक जानकारी देती है. इससे सड़क की जानकारी, नालों की गहराई, जल निकासी की दिशा और निचले इलाकों की पहचान होती है. यह तकनीक खासकर ड्रेनेज, सड़क निर्माण और जल जमाव की समस्या के समाधान में बेहद उपयोगी है.लेजर सर्वे से मिले डाटा के आधार पर बिना अनुमान के वैज्ञानिक तरीके से विकास कार्यों की योजना बनाई जाती है.

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By DEEPAK MISHRA

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