सीवान बन सकता है बर्ड टूरिज्म का नया केंद्र

चौर-तालाबों और नदियों के किनारे परिंदों की चहचहाहट से सीवान की आर्द्रभूमि एक बार फिर जीवंत हो उठी हैं. एशियन वॉटरबर्ड सेंसस की ताजा रिपोर्ट में जिले के जलस्रोतों में देसी और दूर-दराज देशों से आए प्रवासी पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी दर्ज की गई है. यह संकेत है कि सीवान का पर्यावरण धीरे-धीरे संतुलन की ओर लौट रहा है.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण और विकास पर ध्यान दिया गया तो जिला आने वाले दिनों में बर्ड टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है.

विवेक कुमार सिंह, सीवान. चौर-तालाबों और नदियों के किनारे परिंदों की चहचहाहट से सीवान की आर्द्रभूमि एक बार फिर जीवंत हो उठी हैं. एशियन वॉटरबर्ड सेंसस की ताजा रिपोर्ट में जिले के जलस्रोतों में देसी और दूर-दराज देशों से आए प्रवासी पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी दर्ज की गई है. यह संकेत है कि सीवान का पर्यावरण धीरे-धीरे संतुलन की ओर लौट रहा है.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण और विकास पर ध्यान दिया गया तो जिला आने वाले दिनों में बर्ड टूरिज्म और जैव विविधता संरक्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है. इस सर्वेक्षण में जिले की प्रमुख आर्द्रभूमियों को शामिल किया गया.पचरुखी प्रखंड का सुरैला चौर, चकरी ताल, सिसवन प्रखंड के मेहदार स्थित ऐतिहासिक महेंद्रनाथ सरोवर और घाघरा नदी के एक चयनित हिस्से में पक्षियों की गणना की गई.पहली बार चकरी ताल और घाघरा नदी को भी एशियन वॉटरबर्ड सेंसस में शामिल किया गया. जिससे जिले की आर्द्रभूमियों की व्यापक तस्वीर सामने आई.रिपोर्ट के अनुसार सुरैला चौर पक्षी विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल है.यहां कई तरह के जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई, लेकिन ऊंची घास, अत्यधिक जलीय वनस्पति, सुरक्षा की कमी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बड़ी चुनौती बना हुआ है.विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि नियमित रूप से घास और अतिरिक्त वनस्पति की सफाई कराई जाए, शिकार रोकने के लिए गश्ती दल तैनात किए जाएं और पर्यावरण-अनुकूल पहुंच मार्ग विकसित किए जाएं ताकि शोध कार्य और नियंत्रित पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित करने की भी अनुशंसा चकरी ताल बुनियादी सुविधाओं के लिहाज से बेहतर स्थिति में पाया गया.यहां सड़क पहुंच उपलब्ध है, लेकिन ताल में ठोस कचरे का अवैध निस्तारण और अत्यधिक वनस्पति भविष्य के लिए खतरा बनता जा रहा है. रिपोर्ट में चकरी ताल को वेटलैंड पार्क और लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित करने की अनुशंसा की गई है.जहां विद्यार्थियों को आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जानकारी दी जा सके.रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि महेंद्रनाथ मंदिर तालाब और सुरैला ताल सहित सभी स्थलों पर आक्रामक और अनियंत्रित वनस्पतियों की सफाई के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं ताकि आर्द्रभूमियों का प्राकृतिक संतुलन बना रहे और पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण कायम हो सके. प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बन रहा सीवान वन प्रमंडल पदाधिकारी मेघा यादव ने बताया कि इस सर्वेक्षण से जिले की आर्द्रभूमियों की असली तस्वीर सामने आई है.उन्होंने कहा कि जिले के चौर, तालाब और नदी क्षेत्र न सिर्फ देसी बल्कि प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बन रहे हैं, जो पर्यावरण संतुलन के लिए शुभ संकेत है. यदि समय रहते वनस्पति प्रबंधन, कचरा नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया तो सीवान आने वाले वर्षों में पक्षी संरक्षण के नक्शे पर एक अलग पहचान बना सकता है. दो साल में जिले के आर्द्रभूमि क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों की संख्या में इजाफा जिले के दो स्थलों पचरूखी प्रखंड के सुरैला चंवर और सिसवन प्रखंड के मेंहदार में स्थित कमलदाह सरोवर में एशियाई जल पक्षियों की गणना 2025 में की गई थी. गणना के दौरान 34 प्रजातियों के 700 पक्षी मिले थे. गणना के क्रम में नॉर्दर्न पिनटेल, गडवाल, यूरेशियन कूट, फ़ीज़ंट टेल्ड जैकाना जेसे विदेशी प्रवासी पक्षियों को पाया गया था. जो इस ठंड के मौसम में हजारों किमी की यात्रा कर अपने प्रदेश के विभिन्न जिलों में चले आते हैं और मार्च के बाद पुनः चले जाते हैं. वहीं 2026 में एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत कराई गई पक्षी गणना में पचरूखी प्रखंड के सुरैला चौर, गुठनी प्रखंड के चकरी ताल, सिसवन के घाघरा नदी और सिसवन प्रखंड के महेंद्र नाथ मंदिर स्थित कमलदाह सरोवर में बड़ी संख्या में प्रवासी और देशी जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है. गणना के दौरान जिले में कुल 2940 प्रवासी पक्षी रिकॉर्ड किए गए है. इसमें करीब 130 एकड़ में फैले सुरैला चंवर में लगभग सालोंभर पानी जमा रहता है.

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Published by: Deepak mishra

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