Vegetable prices in Siwan: सावन माह शुरू होते ही सीवान के बाजारों में खान-पान का कारोबार बदल गया है. भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन में बड़ी संख्या में लोग मांसाहार से परहेज कर शाकाहारी भोजन अपना रहे हैं. इसका सीधा असर मीट, मुर्गा, मछली और अंडे के कारोबार पर पड़ा है. कारोबारियों के अनुसार, जिले में इन खाद्य पदार्थों की बिक्री करीब 85 फीसदी तक प्रभावित हुई है.
दूसरी ओर, शाकाहारी भोजन की मांग बढ़ने से हरी सब्जियों, दूध और पनीर की बिक्री में तेजी आयी है. मांग बढ़ने के कारण हरी सब्जियों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं. इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
सावन शुरू होते ही मांसाहार का कारोबार मंदा
पवित्र सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है. इसके बाद से ही जिले में मीट, मछली, मुर्गा और अंडे के कारोबार में गिरावट देखने को मिल रही है. कई मांस-मछली की दुकानें बंद हो गयी हैं, जबकि जो दुकानें खुली हैं, वहां ग्राहकों की संख्या काफी कम है.
पोल्ट्री फार्म संचालक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि सावन में हर वर्ष मुर्गे की बिक्री प्रभावित होती है, लेकिन इस बार कारोबार पर ज्यादा असर पड़ा है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में सामान्य दिनों की तुलना में करीब 15 फीसदी ही कारोबार हो पा रहा है. इससे व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
मछली और अंडे की बिक्री भी हुई प्रभावित
मछली विक्रेता मोनू बिंद ने बताया कि सावन के कारण मछली का कारोबार काफी धीमा हो गया है. अधिकांश लोगों के शाकाहारी भोजन अपनाने से मछली की खरीद-बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम हो गयी है. उनके अनुसार, इन दिनों करीब पांच से 10 फीसदी तक ही कारोबार हो रहा है.
शहर में फुटपाथ और ठेला पर अंडे की दर्जनों दुकानें लगती हैं, लेकिन सावन शुरू होने के बाद इन दुकानों पर भी ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गयी है. वहीं कई होटलों में मीट, मुर्गा और मछली की जगह पनीर सहित अन्य शाकाहारी व्यंजन ग्राहकों को परोसे जा रहे हैं.
हरी सब्जियों की मांग बढ़ी, डेढ़ से दोगुने हुए दाम
मांसाहार की जगह हरी सब्जियों की मांग बढ़ने से बाजार में इनके दाम भी चढ़ गये हैं. कारोबारियों के अनुसार, सावन शुरू होते ही हरी सब्जियों की कीमतों में तेजी आने लगी थी. वर्तमान में कई सब्जियों के दाम सामान्य दिनों की तुलना में डेढ़ से दोगुने तक हो गये हैं.
सब्जियों की बढ़ती कीमत का सबसे ज्यादा असर कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है. जो लोग पहले एक से डेढ़ किलो सब्जियां खरीदते थे, वे अब पाव या आधा किलो से काम चला रहे हैं. कई परिवारों की थाली में महंगी हरी सब्जियों की जगह आलू और प्याज की मात्रा बढ़ गयी है.
कोई भी प्रमुख हरी सब्जी 30 रुपये किलो से नीचे नहीं
जिले के बाजारों में वर्तमान में कोई प्रमुख हरी सब्जी 30 रुपये प्रति किलो से कम कीमत पर नहीं मिल रही है. नेनुआ और लौकी जैसी सब्जियों की कीमत भी 40 रुपये किलो तक पहुंच गयी है. परवल 50 से 60 रुपये किलो, करेला और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रहे हैं.
मिर्च की कीमत 100 रुपये किलो तक पहुंच गयी है, जबकि फूलगोभी 50 से 60 रुपये किलो बिक रही है. बैंगन की कीमत करीब 40 रुपये किलो और बोरी की कीमत 50 से 60 रुपये किलो है. टमाटर भी 40 रुपये किलो बिक रहा है.
कम आय वाले परिवारों की थाली पर बढ़ा बोझ
सब्जियों की कीमत में तेजी के कारण कम आय वाले परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है. पहले जहां लोग अपनी जरूरत के अनुसार ज्यादा मात्रा में सब्जियां खरीद लेते थे, वहीं अब कीमत बढ़ने के कारण खरीदारी सीमित करनी पड़ रही है.
आलू 16 रुपये किलो और प्याज 32 रुपये किलो के आसपास बिक रहा है. नींबू की कीमत पांच रुपये प्रति जोड़ा है. ऐसे में सावन में शाकाहारी भोजन की बढ़ी मांग का असर सीधे रसोई के बजट पर पड़ता दिख रहा है.
सब्जियों की कीमत पर एक नजर
| सब्जी | कीमत प्रति किलो |
| नेनुआ | 30-40 रुपये |
| परवल | 50-60 रुपये |
| करेला | 40 रुपये |
| भिंडी | 40 रुपये |
| लौकी | 40 रुपये |
| फूलगोभी | 50-60 रुपये |
| मिर्च | 100 रुपये |
| टमाटर | 40 रुपये |
| बैंगन | 40 रुपये |
| बोरी | 50-60 रुपये |
| आलू | 16 रुपये |
| प्याज | 32 रुपये |
| नींबू | 5 रुपये जोड़ा |
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