सरयू नदी का जलस्तर घटा, अब भी खतरे के निशान से 6 सेंटीमीटर ऊपर; सीवान के गुठनी में दो हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित

Sarju Nadi Water Level: सरयू नदी के जलस्तर में कमी से गुठनी प्रखंड में लोगों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन 2000 हेक्टेयर से अधिक फसलें बाढ़ की भेंट चढ़ गईं. किसानों को आगामी रबी फसल की चिंता सता रही है और वे उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

Sarju Nadi Water Level:गुठनी प्रखंड में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर से जहां हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, वहीं अब नदी के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है. रविवार को जल संसाधन विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार सरयू नदी का जलस्तर 61.42 मीटर दर्ज किया गया. शनिवार को जलस्तर 61.47 मीटर और शुक्रवार को 61.51 मीटर दर्ज किया गया था.

जल संसाधन विभाग के जेई शुभम सिंह ने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 6 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है. हालांकि, पिछले दो दिनों से जलस्तर में लगातार कमी दर्ज होने से स्थानीय लोगों और विभागीय अधिकारियों ने राहत की सांस ली है.

बाढ़ के पानी से करीब दो हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित

बाढ़ के पानी से गुठनी प्रखंड के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्र में करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि में लगी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. खेतों में पानी जमा होने से गोभी, गाजर, मूली, मटर, साग और बैंगन जैसी मौसमी सब्जियां खराब हो गयी हैं.

दियारा क्षेत्र में किसानों द्वारा परवल, शकरकंद, मिर्च, कद्दू, बैंगन और मटर की खेती की गयी थी. बाढ़ का पानी खेतों में घुसने से इन फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में काफी मेहनत और खर्च किया था, लेकिन बाढ़ के कारण पूरी मेहनत पर पानी फिर गया.

आगामी रबी फसल की खेती पर भी पड़ेगा असर

सरयू नदी के बढ़े जलस्तर का असर केवल मौजूदा फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी मौसम की खेती पर भी पड़ने की आशंका है. किसानों के अनुसार खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से जमीन में नमी के साथ दलदल, जलकुंभी और खरपतवार की समस्या उत्पन्न हो गयी है.

ऐसे में गेहूं, सरसों, मटर, आलू, लहसुन, मेथी और मूली जैसी फसलों की खेती प्रभावित हो सकती है. वहीं मक्का, अरहर और तिल की फसलों को भी बाढ़ से नुकसान हुआ है. किसानों को आशंका है कि खेतों से पानी निकलने में देरी हुई तो अगली फसल की बुआई भी प्रभावित होगी.

फसल नुकसान की जांच नहीं होने से किसानों में नाराजगी

बाढ़ के कारण दो हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में लगी फसलों को नुकसान होने के साथ कई घरों में भी पानी घुस गया. ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक फसलों और घरों को हुए नुकसान की समुचित जांच नहीं की गयी है.

ग्रामीणों के अनुसार फसल और घरों के नुकसान का आकलन, पशुओं के चारे की व्यवस्था, मुआवजा तथा प्रभावित लोगों से बातचीत जैसे मुद्दों पर प्रशासन की ओर से अपेक्षित पहल नहीं हुई है. किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.

जलस्तर घटने से तटबंधों पर दबाव होगा कम

सरयू नदी के जलस्तर में लगातार दो दिनों से हो रही कमी को विभाग और ग्रामीणों के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है. विभाग के अनुसार जलस्तर कम होने से गुठनी के गोगरा तटबंध, आंदर प्रखंड के रकौली तथा सिसवन के गंगपुर तटबंध पर पानी का दबाव कम होने की उम्मीद है.

वहीं, कई स्थानों पर तटबंधों से हो रहे रिसाव को विभागीय टीम ने तत्काल प्रयास कर नियंत्रित किया है. अधिकारियों की टीम लगातार संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रख रही है.

तटबंधों और कटाव वाले इलाकों पर विभाग की नजर

कार्यपालक अभियंता मदन चंद चौधरी ने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है. इसके बावजूद विभागीय टीम तटबंधों और कटाव वाले इलाकों का लगातार दौरा कर रही है. संवेदनशील स्थानों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके.

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By चंद्र प्रकाश दूबे

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