Sarayu River Crossing: पंचमदीरा घाट से उत्तर प्रदेश के खरीद गांव तक सरयू नदी पार करने वाले लोगों का सफर इन दिनों जोखिम भरा बना हुआ है. सरयू का जलस्तर बढ़ने और पीपा पुल हटाये जाने के बाद स्थानीय लोगों के पास नाव से नदी पार करने के अलावा कोई आसान विकल्प नहीं बचा है. ऐसे में रोजाना बड़ी संख्या में लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि नाव संचालक यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर क्षमता से अधिक सवारियां बैठा रहे हैं. नावों पर साइकिल, बाइक के साथ भारी सामान भी लादा जा रहा है.
क्षमता से दो से तीन गुना तक सवारियां बैठाने का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह सात से नौ बजे के बीच पंचमदीरा घाट पर यात्रियों की सबसे अधिक भीड़ रहती है. दूध और सब्जी विक्रेताओं के अलावा खरीद, सिकंदरपुर, बलिया और बक्सर समेत आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले लोग इसी समय नदी पार करते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि जिस नाव पर करीब 25 से 30 यात्रियों को बैठाया जाना चाहिए, उस पर कई बार 70 से 100 तक लोगों को बैठा लिया जाता है. क्षमता से अधिक भार होने के कारण नदी पार करते समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
नाव में भरता रहता है पानी, चालक करते हैं बाहर
ग्रामीणों का कहना है कि घाट पर चलने वाली कई नावें पुरानी हो चुकी हैं. यात्रा के दौरान नाव में धीरे-धीरे पानी भरता रहता है, जिसे चालक कुछ-कुछ देर पर बाहर निकालते रहते हैं. ऐसे में अधिक सवारियों और सामान के साथ नदी पार करना यात्रियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है. स्थानीय लोगों ने नावों की फिटनेस, क्षमता और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच कराने की मांग की है.
पीपा पुल हटने के बाद नाव पर बढ़ी निर्भरता
पीपा पुल हटाये जाने के बाद नदी के दोनों किनारों के लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में जाने पर करीब 80 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. समय और पैसे की बचत के कारण लोग नाव से आवागमन को प्राथमिकता देते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाकर नाव संचालक मनमाना किराया भी वसूलते हैं.
जांच के बाद कुछ दिनों तक सुधरती है व्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से जांच अभियान चलाये जाने पर कुछ दिनों तक नाव संचालन में नियमों का पालन होता है, लेकिन जांच समाप्त होते ही स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है. ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निरीक्षण कराने, नाव की क्षमता के अनुसार ही यात्रियों को बैठाने और जर्जर नावों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है.
क्या कहते हैं सीओ
अंचलाधिकारी विद्याभूषण भारती ने कहा कि मामले की सूचना मिली है. वह स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे. साथ ही इस संबंध में उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को भी जानकारी दी जाएगी.
