Siwan News: जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा के निर्देश पर सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वच्छता, दवाओं के भंडार, उपकरणों की कार्यशीलता और मरीजों की सुविधाओं का जायजा लेने के लिए गुरुवार को विशेष प्रशासनिक टीम ने औचक निरीक्षण किया. जांच टीम में उप समाहर्ता भूमि सुधार (डीसीएलआर) नलिनी कुमारी और संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार शामिल रहे. दोनों अधिकारियों ने सुबह लगभग 11 बजे अस्पताल पहुंचकर विभिन्न वार्डों और इकाइयों की पड़ताल की. इस दौरान अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह और डीपीएम विशाल कुमार सिंह भी उपस्थित रहे.
दोनों लिफ्ट खराब, सीढ़ियों से चौथी मंजिल तक पहुंचे अधिकारी
मॉडल सदर अस्पताल भवन में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई दोनों लिफ्ट खराब पाई गईं. इसके चलते जांच टीम को सीढ़ी और रैंप के सहारे चौथी मंजिल तक जाना पड़ा. अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में लिफ्ट का बंद रहना गंभीर मरीजों, दिव्यांगों और तीमारदारों के लिए निरंतर परेशानी का सबब बना हुआ है. जांच टीम ने इस स्थिति को बेहद गंभीर माना.
425 में से 383 दवाएं मिलीं, 42 का स्टॉक शून्य
औषधि भंडार के निरीक्षण के दौरान फर्मासिस्ट ने जांच दल को बताया कि अस्पताल में कुल 425 प्रकार की दवाएं सूचीबद्ध हैं. भौतिक सत्यापन में 383 प्रकार की दवाएं उपलब्ध पाई गईं, जबकि 42 आवश्यक दवाएं स्टॉक में मौजूद नहीं थीं. टीम ने दवाओं की आवक, वितरण पंजी और उपलब्ध स्टॉक का विस्तृत विवरण दर्ज किया. वहीं, जीविका के सफाई कक्ष की जांच में सफाई कार्य में प्रयुक्त होने वाली मशीनें अकार्यशील पाई गईं, जिस पर अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई.
पीकू, एसएनसीयू और डायलिसिस केंद्र जांच से रहे अछूते
जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम को चिकित्सकों, नर्सों और कर्मचारियों के ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक उपस्थिति, आपातकालीन सेवाओं, मरीजों के आहार और उनकी प्रतिक्रिया की समग्र जांच करनी थी. हालांकि, इस विस्तृत जांच अभियान के दौरान अस्पताल के कई अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग छूट गए. टीम ने पीकू (PICU) वार्ड, एसएनसीयू (SNCU), मॉडल टीकाकरण केंद्र, सामान्य ओपीडी, नेत्र, दंत व ऑर्थो ओपीडी, एनसीडी क्लीनिक, यक्ष्मा विभाग और डायलिसिस केंद्र का निरीक्षण नहीं किया. इससे संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की पड़ताल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को होगी समर्पित
निरीक्षण कार्य पूरा होने के बाद जब संवाददाताओं ने जांच दल से बातचीत का प्रयास किया, तो उन्होंने विस्तृत टिप्पणी करने से मना कर दिया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण की वस्तुस्थिति से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी. अब सभी की नजरें प्रशासनिक रिपोर्ट पर हैं कि अस्पताल में उजागर हुई कमियों और जांच से छूटे विभागों पर प्रशासन क्या सुधारात्मक कदम उठाता है.
