Siwan News : कृषि यंत्रीकरण योजना के जिला स्तर पर प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) की भूमिका समाप्त किये जाने तथा उप निदेशक कृषि अभियंत्रण को जिला आहरण एवं संवितरण पदाधिकारी (डीडीओ) का अलग दायित्व सौंपे जाने की व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग उठने लगी है. अधिकारियों और कर्मियों ने इस व्यवस्था से योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के बीच समन्वय प्रभावित होने की आशंका जतायी है.
योजना के क्रियान्वयन में डीएओ की रही है अहम भूमिका
बताया जाता है कि कृषि यंत्रीकरण योजना के संचालन में जिला कृषि पदाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. जिला स्तर पर योजना के क्रियान्वयन, कार्यों की समीक्षा और निगरानी, विभागीय निर्देशों के अनुपालन तथा विभिन्न पदाधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने में डीएओ महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते रहे हैं.
कुछ कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान व्यवस्था में योजना के क्रियान्वयन से डीएओ की भूमिका लगभग समाप्त कर दी गयी है. इससे योजना से जुड़े कार्यों की निगरानी और जिला स्तर पर समन्वय को लेकर व्यावहारिक परेशानी उत्पन्न होने की आशंका है.
उप निदेशक कृषि अभियंत्रण पर बढ़ेगा अतिरिक्त दायित्व
वहीं, उप निदेशक कृषि अभियंत्रण को डीएओ से अलग करते हुए डीडीओ का दायित्व भी सौंपा गया है. अधिकारियों और कर्मियों का कहना है कि इससे उप निदेशक कृषि अभियंत्रण के कार्य और उत्तरदायित्व बढ़ेंगे.
अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी के कारण कृषि यंत्रीकरण योजना के कार्यों के लिए अपेक्षित समय देने तथा प्रभावी पर्यवेक्षण में परेशानी आने की संभावना जतायी जा रही है.
लाभुकों से जुड़े कार्यों में समन्वय जरूरी
कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत लाभुकों से जुड़े कार्य, कृषि यंत्रों का सत्यापन और वितरण, अनुदान संबंधी प्रक्रिया, विभागीय निर्देशों का अनुपालन तथा समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाता है. इन सभी कार्यों के लिए जिला स्तर पर बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी जरूरी है.
कर्मियों का मानना है कि डीएओ को योजना से अलग किये जाने की स्थिति में निगरानी और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इससे योजना के कार्यों के समयबद्ध निष्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है.
दायित्वों के व्यावहारिक विभाजन की मांग
अधिकारियों और कर्मियों ने कृषि यंत्रीकरण योजना के निर्बाध, समयबद्ध और प्रभावी संचालन के लिए डीएओ की भूमिका को यथोचित रूप से बनाए रखने की मांग की है. साथ ही उप निदेशक कृषि अभियंत्रण और डीएओ के दायित्वों का स्पष्ट एवं व्यावहारिक विभाजन करने की मांग भी उठायी गयी है, ताकि योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और समन्वय की व्यवस्था प्रभावी बनी रहे.
