अवैध कोयला को लेकर भट्ठा संचालकों पर कसेगा शिकंजा

असम से बिना वैध कागजात और जीएसटी चुकाए कोयले की आपूर्ति कर ईंट भट्ठों में उपयोग किए जाने के मामलों को लेकर अब ईंट भट्ठा संचालकों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को वाणिज्य कर विभाग में राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रभारी राजीव कुमार झा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जिसमें जिले के ईंट भट्ठों से जुड़े कर अनुपालन और राजस्व में आ रही गिरावट पर गंभीर मंथन हुआ.

प्रतिनिधि, सीवान. असम से बिना वैध कागजात और जीएसटी चुकाए कोयले की आपूर्ति कर ईंट भट्ठों में उपयोग किए जाने के मामलों को लेकर अब ईंट भट्ठा संचालकों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को वाणिज्य कर विभाग में राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रभारी राजीव कुमार झा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई. जिसमें जिले के ईंट भट्ठों से जुड़े कर अनुपालन और राजस्व में आ रही गिरावट पर गंभीर मंथन हुआ.बैठक में स्पष्ट किया गया कि लगातार यह शिकायत मिल रही है कि असम से कोयले की खेप बिना जीएसटी और अन्य करों का भुगतान किए जिले में मंगाई जा रही है और उसका उपयोग ईंट भट्ठों में किया जा रहा है. इसी के मद्देनज़र सरकार के निर्देश पर वाणिज्य कर विभाग द्वारा जिले के सभी ईंट भट्ठों की सघन जांच शुरू कर दी गई है. जांच टीम ईंट भट्ठों में उपयोग किए जा रहे कोयले के खरीद कागजात, आपूर्तिकर्ता का विवरण, जीएसटी भुगतान की स्थिति के साथ-साथ भट्ठे में निर्मित ईंटों की संख्या का भी आकलन कर रही है. इसी आधार पर भट्ठा संचालकों का वास्तविक राजस्व तय किया जा रहा है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब प्रत्येक ईंट भट्ठा संचालक को यह बताना होगा कि कोयला किससे खरीदा गया है और आपूर्ति करने वाले द्वारा जीएसटी सहित सभी करों का भुगतान किया गया है या नहीं.बैठक में यह भी सामने आया कि जिले में जीएसटी से निबंधित करीब 218 ईंट भट्ठे हैं. हर वर्ष अक्टूबर के बाद ईंट भट्ठों में ईंट पकाने का कार्य शुरू हो जाता है और इसी दौरान कोयले की मांग सबसे अधिक रहती है. बावजूद इसके ईंट भट्ठों की संख्या बढ़ने के अनुपात में कोयले से प्राप्त होने वाला जीएसटी राजस्व लगातार घट रहा है. जिला ईंट निर्माण संघ के साथ हुई बैठक में यह निर्देश दिया गया कि जिन ईंट भट्ठा संचालकों ने अब तक जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है, वे अनिवार्य रूप से तत्काल पंजीकरण कराएं. साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 का बकाया कर एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 का देय कर मार्च माह तक हर हाल में जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया. समीक्षा के दौरान यह भी कहा गया कि जांच में यह बात सामने आ रही है कि कई ईंट भट्ठा संचालक कर के रूप में अत्यंत कम राशि जमा कर रहे हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है. विभाग ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.बैठक में जिला अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह, प्रदेश प्रवक्ता नुरुल हक, जिला प्रवक्ता मुन्ना भाई, जिला सचिव हसम अली, शिवजी शाह, ब्रजेश सिंह, संजय सिंह, कैलाश पंडित, बबलू सिंह, रामकुमार सिंह और रमेश सिंह सहित कई पदाधिकारी व भट्ठा संचालक मौजूद थे.

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Author: DEEPAK MISHRA

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