नीलगाय कर रही गेंहू की फसल बर्बाद

प्रखंड में नीलगाय और अन्य छुट्टा पशु किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बन गए हैं. नीलगाय के झुंड खेतों में खड़ी और तैयार फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रही है. साधपुर, उजाय, बग़ौरा, भूसी, मुड़ा एवं सिरसंव मठिया सहित कई गांवों में गेहूं, चना, सरसों और अरहर की फसलें सर्वाधिक प्रभावित हो रही हैं

प्रतिनिधि, दरौंदा. प्रखंड में नीलगाय और अन्य छुट्टा पशु किसानों के लिए एक गंभीर समस्या बन गए हैं. नीलगाय के झुंड खेतों में खड़ी और तैयार फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रही है. साधपुर, उजाय, बग़ौरा, भूसी, मुड़ा एवं सिरसंव मठिया सहित कई गांवों में गेहूं, चना, सरसों और अरहर की फसलें सर्वाधिक प्रभावित हो रही हैं. किसानों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में नीलगाय की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. सुबह और शाम के समय इनके झुंड खुलेआम खेतों में घूमते देखे जा सकते हैं. अपनी फसलों को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद नुकसान थम नहीं रहा है. किसानों का आरोप है कि नीलगाय से होने वाले फसल नुकसान को लेकर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है. कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद न तो मुआवजे की प्रक्रिया स्पष्ट हो पाई है और न ही कोई स्थायी समाधान निकल सका है. किसानों ने प्रशासन से नीलगाय नियंत्रण के लिए एक प्रभावी योजना लागू करने, फसल नुकसान का त्वरित सर्वेक्षण कराने और उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है.

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Author: DEEPAK MISHRA

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