संवाददता,सीवान. सीवान. प्रभात खबर का ””दाहा नदी बचाओ अभियान”” अब एक व्यापक जन-मुहिम का रूप ले चुका है. विलुप्त हो रही इस नदी को बचाने के लिए नागरिकों द्वारा लगातार उठाई जा रही मांग का ही परिणाम है कि जिला प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है. जिले के संबंधित अंचलाधिकारियों ने नदी क्षेत्र की नापी कर अतिक्रमण को चिह्नित करने का कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दिया है. भू-माफियाओं का खेल उजागर प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि भू-माफियाओं ने कम कीमत का लालच देकर नदी की जमीन को ही कई स्थानों पर बेच दिया है. वर्तमान में नदी की भूमि पर कई बड़ी इमारतें खड़ी हो चुकी हैं. प्रशासन की सक्रियता के बाद अब इन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिससे भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप मचा हुआ है. नदी और जनजीवन का पौराणिक रिश्ता ऐतिहासिक रूप से सीवान शहर दाहा नदी के मुहाने पर बसा है और यह नदी जिले के लगभग आधा दर्जन प्रखंडों से होकर गुजरती है. कभी स्थानीय लोगों के जीवन का सीधा आधार रही यह नदी हमारे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में पौराणिक महत्व रखती है. समय के साथ नदी की धारा बदलती गई और सूखे तट की जमीन पर माफियाओं की नजरें टिक गईं. प्रशासनिक उदासीनता का लाभ उठाकर इन जमीनों पर अवैध कब्जे कर लिए गए. डीएम का सख्त आदेश और माइक्रोप्लान जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने जल संसाधन विभाग के निर्देशों के आलोक में सख्त रुख अपनाया है. इसके तहत अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में एक विशेष टीम बनाई गई है.राजस्व कर्मचारियों और अमीन को निर्देश दिया गया है कि वे माइक्रोप्लान तैयार कर 20 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें.अनुमंडल पदाधिकारी को पूरी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा गया है. सरकार का संकल्प: अतिक्रमण मुक्त होंगी नदियां राज्य सरकार के फैसले का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमण करने वालों को चिह्नित कर उन पर ””अतिक्रमणवाद”” चलाया जाए और उन्हें दंडित किया जाए. इसी क्रम में सीवान जिला प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसके आधार पर जल्द ही बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया जाएगा.
भू माफियाओं ने बेच दी दाहा नदी की जमीन
सीवान. प्रभात खबर का ''दाहा नदी बचाओ अभियान'' अब एक व्यापक जन-मुहिम का रूप ले चुका है. विलुप्त हो रही इस नदी को बचाने के लिए नागरिकों द्वारा लगातार उठाई जा रही मांग का ही परिणाम है कि जिला प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है. जिले के संबंधित अंचलाधिकारियों ने नदी क्षेत्र की नापी कर अतिक्रमण को चिह्नित करने का कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ कर दिया है.
