Siwan News : सीवान जिले में मानसून के सक्रिय होने के बाद लगातार हो रही बारिश ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है. कृषि विभाग के अनुसार, पिछले चार दिनों में जिले में 100 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे धान की रोपनी में तेजी आई है और खरीफ फसलों को नया जीवन मिला है. विभाग का मानना है कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो धान सहित अन्य खरीफ फसलों का निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा हो जाएगा.
किसानों का कहना है कि जून और जुलाई की शुरुआत में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण उन्हें मोटर पंप के सहारे सिंचाई कर रोपनी करनी पड़ रही थी. खेतों में पानी की कमी से रोपनी की रफ्तार काफी धीमी थी.
धान की फसल को मिली नई संजीवनी
जो किसान पहले ही धान की रोपनी कर चुके थे, वे बारिश नहीं होने से फसल के सूखने की चिंता में थे. अनियमित वर्षा के कारण धान और अन्य खरीफ फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही थी, जिससे पौधे मुरझाने लगे थे. अब लगातार बारिश से फसलों को पर्याप्त नमी मिल रही है और उनकी बढ़वार बेहतर होने लगी है.
किसानों ने बताया कि तेज धूप और उमस के कारण धान की नर्सरी में रोग और खरपतवार का प्रकोप बढ़ गया था. वर्षा होने के बाद मौसम में ठंडक आने से इन समस्याओं में भी कमी आई है. किसान केदारनाथ गिरी सहित अन्य किसानों का कहना है कि अब फसलों पर मौसमी रोगों का असर भी घटने लगा है, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद बढ़ गई है.
लक्ष्य से पिछड़ी थी खेती
जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून कमजोर रहने के कारण जिले में खरीफ खेती लक्ष्य से पीछे चल रही थी. अधिकांश किसान धान की खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं. जून में जहां औसत वर्षापात 143 मिमी होना चाहिए था, वहीं केवल 43 मिमी बारिश हुई. जुलाई का औसत वर्षापात 321 मिमी है और अब लगातार बारिश से लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है. कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2026-27 में जिले में खरीफ फसलों का कुल आच्छादन लक्ष्य 1,26,850 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जबकि केवल धान की खेती का लक्ष्य 1,03,056 हेक्टेयर रखा गया है.
क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि मानसून सक्रिय होने के बाद धान की रोपनी में तेजी आई है. यदि मौसम का यही रुख बना रहा तो सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य शीघ्र प्राप्त कर लिया जाएगा और इस वर्ष धान की अच्छी पैदावार की पूरी संभावना है.
