Siwan News : प्रखंड क्षेत्र में स्थापित कई सरकारी नलकूप वर्षों से बंद पड़े हैं. इन पर अब तक नलकूप विभाग के अधिकारियों का ध्यान नहीं गया है. लाखों रुपये की लागत से लगाए गए मोटर और अन्य उपकरण लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण बेकार हो चुके हैं. इससे किसानों को सिंचाई के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
छह स्थानों पर लगे नलकूप हुए निष्क्रिय
नलकूप विभाग की ओर से प्रखंड क्षेत्र के तिरबलुआ, योगियाडीह, गुठनी पूर्वी, गुठनी पश्चिमी, धर्मपुर, सोनहुला और मैरीटार सहित विभिन्न स्थानों पर करीब तीन दशक पहले मोटरयुक्त नलकूप स्थापित किए गए थे. शुरुआती कुछ वर्षों तक इनका संचालन हुआ, लेकिन बाद में विभागीय लापरवाही के कारण सभी नलकूप बंद हो गए. इसके चलते नलकूपों से जुड़े ऑपरेटर, फिटर और पंप मैकेनिक सहित कई लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया. बताया जाता है कि इस मामले को लेकर कई लोग अब भी न्यायालय में मुकदमा लड़ रहे हैं.
नलकूप बंद होने से किसानों की बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि नलकूप चालू रहने से किसानों को कम लागत में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाता था. इससे हर मौसम में खेती करना आसान था और दियारा क्षेत्रों तक सिंचाई की सुविधा पहुंचती थी. पिछले करीब दस वर्षों से नलकूप बंद रहने के कारण किसानों को महंगे डीजल पंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. बैकुंठ दुबे, कुसुम पांडेय, विनोद सिंह, मोहित सिंह, रहीमुद्दीन अंसारी, इमामुद्दीन अंसारी और आत्मा तिवारी सहित कई ग्रामीणों ने कहा कि डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती महंगी होती जा रही है. उन्होंने बंद नलकूपों को चालू कराने के लिए व्यापक अभियान चलाने की मांग की है.
सात नलकूपों के संचालन को मिली स्वीकृति
नलकूप विभाग ने जिले के बंद पड़े नलकूपों की स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेजी थी. इसके बाद जिले में सात नलकूपों को दोबारा चालू करने की स्वीकृति मिली है. इनमें गुठनी के दो, मैरवा का एक और नौतन के चार नलकूप शामिल हैं. इन नलकूपों के पुनर्संचालन और मरम्मत पर कुल 1 करोड़ 79 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि शेष बंद नलकूपों को भी जल्द चालू कराया जाएगा, जिससे किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिल सके.
