Siwan News : कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से उत्पन्न संकट को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से 500 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित कराया था. हालांकि उद्घाटन के करीब पांच वर्ष बाद भी यह प्लांट चालू नहीं हो सका है. इससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.
75 से 100 बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने की थी व्यवस्था
ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के माध्यम से अस्पताल के लगभग 75 बेड तक पाइपलाइन से ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी. इसके अलावा पीएसए प्लांट के जरिए 100 बेड तक ऑक्सीजन आपूर्ति की सुविधा भी विकसित की गई थी. बावजूद इसके प्लांट वर्षों से बंद पड़ा है और मशीनों पर धूल जमने लगी है.
मरीज अब भी सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर निर्भर
प्रतिदिन 200 से 300 मरीजों का इलाज करने वाले अनुमंडलीय अस्पताल में आज भी ऑक्सीजन की जरूरत सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से पूरी की जा रही है. प्लांट बंद रहने के कारण अस्पताल को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, वहीं मरीजों और उनके परिजनों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.
टेक्नीशियन की कमी से अधर में लटकी परियोजना
वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑक्सीजन प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन किया था. शुरुआत में प्योरिटी सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण प्लांट चालू नहीं हो सका. बाद में प्रमाणपत्र मिलने के बावजूद टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होने से यह महत्वपूर्ण परियोजना आज तक शुरू नहीं हो पाई है.
लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्लांट का संचालन ही नहीं करना था तो करोड़ों रुपये खर्च कर इसका निर्माण और उद्घाटन क्यों कराया गया. उनका आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण जीवनरक्षक परियोजना वर्षों से बंद पड़ी है. इस मुद्दे को कई बार सिविल सर्जन से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.
क्या बोले अस्पताल के उपाधीक्षक
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. सुमीत कुमार सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण अस्पताल के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह अब तक चालू नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि प्लांट बंद रहने का नुकसान अस्पताल को उठाना पड़ रहा है और कई बार मरीजों तथा उनके परिजनों के आक्रोश का सामना भी करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि प्लांट संचालन के लिए दो कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, लेकिन टेक्नीशियन की कमी के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका.
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