Siwan Model Hospital : सीवान मॉडल सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. बसंतपुर प्रखंड के एक गांव की एचआईवी रिएक्टिव प्रसूता करीब 36 घंटे तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही. परिजनों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे निजी अस्पताल में जाकर सिजेरियन करा सकें. आरोप है कि रविवार की देर शाम महिला वार्ड में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रसूता और उसके परिजनों को परेशान किया और अस्पताल से चले जाने के लिए कह दिया. इसके बाद बेबस परिजन प्रसूता को लेकर एक झोलाछाप चिकित्सक के पास चले गये और बाद में अपना मोबाइल बंद कर लिया.
अधिकारियों तक पहुंची थी मामले की जानकारी
मामला तब और गंभीर हो जाता है, जब अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के कई वरीय अधिकारियों को इसकी जानकारी होने की बात सामने आयी है. सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद, जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार और सदर अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह तक मामले की जानकारी पहुंचायी गयी थी. इसके बाद महिला को वार्ड में बेड उपलब्ध कराकर उपचार शुरू किये जाने की बात सामने आयी, लेकिन प्रसव के लिए आवश्यक निर्णायक कदम समय पर नहीं उठाया जा सका.
अल्ट्रासाउंड में कम मिला गर्भ का पानी
शनिवार को कराये गये अल्ट्रासाउंड में गर्भ में पानी की मात्रा 10.20 सेंटीमीटर दर्ज की गयी थी. रविवार को स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजनों को बताया कि पानी का रिसाव होने के कारण इसकी मात्रा घटकर करीब पांच सेंटीमीटर रह गयी है. नर्सिंग स्टाफ की ओर से सिजेरियन की जरूरत बताये जाने के बावजूद प्रसूता को समय पर ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल सकी.
एचआईवी रिएक्टिव गर्भवती के सुरक्षित प्रसव पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक प्रसूता के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि एचआईवी रिएक्टिव गर्भवती महिलाओं और उनके नवजातों के लिए चलाये जा रहे सरकारी कार्यक्रमों की जमीनी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है. एचआईवी रिएक्टिव गर्भवती को सरकारी अस्पताल में समय पर सुरक्षित प्रसव की सुविधा नहीं मिल पाने की स्थिति में मां से बच्चे में संक्रमण की रोकथाम के सरकारी प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
