सीवान से विवेक कुमार प्रजापति की रिपोर्ट
Siwan News : मैरवा स्थित रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी अब बेटियों के लिए खेल प्रशिक्षण के साथ आत्मनिर्भरता का भी केंद्र बनती जा रही है. यहां प्रशिक्षण लेने वाली कई बेटियों ने फुटबॉल समेत विभिन्न खेलों में जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. खेल के मैदान में पहचान बनाने के बाद कई खिलाड़ियों ने सरकारी सेवाओं में भी जगह हासिल की है.
ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर इन बेटियों की सफलता ने दूसरी लड़कियों और उनके परिवारों में भी खेल को लेकर उम्मीद जगायी है. एकेडमी से जुड़ी खिलाड़ियों की उपलब्धियां यह संदेश दे रही हैं कि बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर छोटे शहर और गांव की बेटियां भी बड़े मंच तक पहुंच सकती हैं.
ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने की पहल
रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी की स्थापना और बेटियों को प्रशिक्षण देने में संरक्षक एवं कोच संजय पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाशाली बेटियों को बेहतर प्रशिक्षण और उचित मंच उपलब्ध कराना रहा है.
एकेडमी में खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास, अनुशासन और प्रतियोगिताओं की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है. खेल प्रतिभाओं को उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर देने की कोशिश की जाती है.
खेल के साथ सरकारी नौकरी में भी बनाई पहचान
एकेडमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कई खिलाड़ियों ने खेल प्रतियोगिताओं में उपलब्धियां हासिल करने के साथ सरकारी सेवाओं में भी अपनी जगह बनायी है. केंद्र और बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों का चयन हुआ है.
खेल के माध्यम से सरकारी नौकरी हासिल करने वाली इन बेटियों की सफलता ने अन्य खिलाड़ियों के लिए भी नयी उम्मीद पैदा की है. इससे परिवारों में भी बेटियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने को लेकर विश्वास बढ़ा है.
ब्रांड एंबेसडर बनकर दिया जागरूकता का संदेश
एकेडमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समय-समय पर बिहार सरकार और चुनाव आयोग की ओर से विभिन्न अभियानों के लिए ब्रांड एंबेसडर की जिम्मेदारी भी दी गयी है. इन अभियानों के माध्यम से खिलाड़ियों ने खेल के साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेश लोगों तक पहुंचाये हैं.
इससे खिलाड़ियों की पहचान केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें सामाजिक गतिविधियों में भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिला.
खेल से बेटियों में बढ़ता है आत्मविश्वास
कोच संजय पाठक का कहना है कि खेल सिर्फ पदक जीतने का माध्यम नहीं है. खेल के जरिए बेटियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता विकसित होती है.
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रतिभाशाली बेटियां संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा को आगे नहीं ले जा पाती हैं. ऐसे खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और मंच उपलब्ध कराने का प्रयास एकेडमी के माध्यम से किया जा रहा है.
छोटे शहर से बड़े मंच तक पहुंच रही बेटियां
रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स एकेडमी से जुड़ी बेटियों की उपलब्धियां बताती हैं कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. सही मार्गदर्शन, नियमित प्रशिक्षण और अवसर मिले तो गांव और छोटे शहरों की खिलाड़ी भी जिला स्तर से निकलकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं.
मैरवा की इन बेटियों की कहानी दूसरी ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है. खेल के मैदान से सरकारी सेवा तक पहुंची खिलाड़ियों ने साबित किया है कि मेहनत और अवसर का साथ मिले तो बेटियों के लिए आगे बढ़ने की संभावनाएं काफी व्यापक हैं.
