Siwan News: भगवानपुर हाट प्रखंड क्षेत्र के महमदपुर चवर स्थित सहनी मत्स्य उत्पादन केंद्र एवं फिश फीड मिल का बुधवार को मत्स्ययिकी महाविद्यालय, ढोली की वैज्ञानिकों एवं छात्रों की टीम ने भ्रमण किया. टीम का नेतृत्व मत्स्य अधिष्ठाता डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने किया.
आधुनिक मत्स्य उत्पादन तकनीकों की ली जानकारी
भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने मत्स्य पालक किसान शिव प्रसाद सहनी से आधुनिक मत्स्य उत्पादन तकनीकों, प्रबंधन और उनके अनुभवों की जानकारी ली. वहीं शिव प्रसाद सहनी ने भी छात्रों और वैज्ञानिकों के साथ अपने अनुभव साझा किए तथा मत्स्य उत्पादन से जुड़ी नई शोध एवं तकनीकों की जानकारी प्राप्त की.
प्रजनन काल में मछली संरक्षण पर दिया जोर
इस अवसर पर डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि अंडा देने के मौसम में मछलियों का शिकार या सेवन नहीं करने से मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. उन्होंने बताया कि यदि प्रजनन काल में करीब दो किलोग्राम की एक रोहू मछली पकड़ ली जाती है, तो उसके साथ लगभग चार लाख अंडे भी नष्ट हो जाते हैं. इससे मछलियों की संख्या बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों में प्रजनन काल के दौरान मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है तथा मछलियों के न्यूनतम आकार का भी निर्धारण किया गया है. महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां प्रजनन के मौसम में मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने नहीं जाते, जिससे मत्स्य संसाधनों का संरक्षण होता है.
बिहार में भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि यदि बिहार में भी इस प्रकार की जागरूकता और संरक्षण की व्यवस्था अपनाई जाए, तो मत्स्य उत्पादन में काफी वृद्धि संभव है.
भ्रमण दल में मत्स्य विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम नाथ झा, एक्वाकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ. शिवेंद्र कुमार, डॉ. रौशन कुमार, डॉ. प्रवेश कुमार, डॉ. राजीव कुमार ब्रह्माचारी, डॉ. एस. विद्यासागर सहित मत्स्य स्नातकोत्तर एवं शोध के छात्र-छात्राएं शामिल थे.
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