Siwan Farmer News : सीवान के बड़हरिया प्रखंड के पश्चिमोत्तर इलाके में चीनी मिल बंद होने के बाद खेती का स्वरूप बदल गया है. कभी गन्ने की खेती यहां के किसानों की आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार थी. मीरगंज स्थित एसकेजी चीनी मिल बंद होने के बाद गन्ने की बिक्री और परिवहन की समस्या बढ़ी, तो किसानों ने धीरे-धीरे सब्जी की खेती शुरू कर दी. अब आलू, टमाटर, गोभी और अन्य सब्जियां उनकी आजीविका का अहम हिस्सा हैं.
चीनी मिल बंद हुई तो किसानों की खेती बदल गई
बड़हरिया प्रखंड के पश्चिमोत्तर इलाके में कभी गन्ने की खेती किसानों की आर्थिक मजबूती का प्रमुख जरिया हुआ करती थी. किसान अपनी गन्ने की उपज मीरगंज स्थित श्रीयुत कृष्ण-गोपाल यानी एसकेजी चीनी मिल में बेचते थे. इससे मिलने वाली आमदनी से परिवार की बड़ी जरूरतें पूरी होती थीं.
गन्ने की कमाई से चलता था परिवार
स्थानीय किसानों के अनुसार गन्ने की खेती से होने वाली आमदनी का इस्तेमाल बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई और परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों में किया जाता था. गन्ना लंबे समय से इलाके की प्रमुख नगदी फसल रहा, इसलिए किसानों को इसकी बिक्री को लेकर अपेक्षाकृत भरोसा रहता था.
मिल बंद हुई तो गन्ने की बिक्री बनी चुनौती
गोपालगंज जिले के मीरगंज स्थित एसकेजी चीनी मिल के बंद होने के बाद किसानों के सामने गन्ने की बिक्री की समस्या खड़ी हो गई. किसानों का कहना है कि दूर की मिलों तक गन्ना पहुंचाने में परिवहन खर्च बढ़ जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर उचित खरीद व्यवस्था नहीं होने से खेती का हिसाब बिगड़ने लगा.
मजबूरी में सब्जी की खेती की ओर बढ़े किसान
गन्ने की खेती में बिक्री की परेशानी बढ़ने के बाद पश्चिमोत्तर इलाके के कई किसानों ने सब्जी की खेती शुरू कर दी. अब किसान आलू, टमाटर, गोभी, बैंगन, मिर्च, खीरा और दूसरी मौसमी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. सब्जी से उन्हें बाजार के अनुसार नियमित आय का अवसर मिलता है.
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दर्जनों गांवों में बदला खेती का पैटर्न
नरहरपुर, गिरिधरपुर, मुसेहरी, कैलगढ़, जोगापुर, नबीहाता, शिवधरहाता, मलिक टोला, रोहड़ा, औराईं, महम्मदपुर, सुंदरी, लकड़ी, जलटोलिया, गौसीहाता, नबीगंज, बंगरा और पकड़ी समेत पश्चिमोत्तर क्षेत्र के कई गांवों में खेती का यह बदलाव देखने को मिल रहा है.
सब्जी से आय है, लेकिन गन्ने जैसा भरोसा नहीं
किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती से उन्हें अलग-अलग मौसम में आमदनी मिल रही है, लेकिन बाजार भाव और फसल खराब होने का जोखिम बना रहता है. उनके मुताबिक गन्ने की खेती में मिल के माध्यम से खरीद की व्यवस्था होने से आमदनी का एक भरोसा रहता था, जो अब नहीं है.
हर किसान के लिए सब्जी की खेती आसान नहीं
किसानों के सामने एक दूसरी चुनौती भी है. उनका कहना है कि जो किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती आसानी से कर लेते थे, उनके लिए सब्जी की खेती हमेशा आसान नहीं होती. सब्जियों में सिंचाई, मजदूरी, तुड़ाई और बाजार तक पहुंचाने जैसी जरूरतें अधिक नियमित रहती हैं.
फिर गन्ने की ओर लौटना चाहते हैं किसान
स्थानीय किसान झूलन मिश्र, राजवल्लभ सिंह, अमरजीत प्रसाद, मदन प्रसाद, मृत्युंजय कुशवाहा, राजकुमार प्रसाद और अरविंद प्रसाद सहित अन्य किसानों का कहना है कि यदि क्षेत्र में चीनी मिल फिर से शुरू होती है या गन्ना उत्पादकों के लिए प्रभावी खरीद व्यवस्था विकसित की जाती है, तो किसान दोबारा गन्ने की खेती की ओर लौट सकते हैं.
किसानों ने फिर उठाई एसकेजी चीनी मिल खोलने की मांग
किसानों का कहना है कि चीनी मिल दोबारा चालू होने से केवल गन्ना उत्पादकों को ही लाभ नहीं होगा, बल्कि आसपास के गांवों में रोजगार और कृषि आधारित कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है. किसानों ने सरकार से एसकेजी चीनी मिल को फिर से खोलने की मांग दोहराई है.
