बारिश से किसानों के चेहरे खिले

पिछले कई हफ्तों से बारिश न होने के कारण पूरे इलाके के किसान चिंता में थे. धान की रोपनी के बाद लगातार पानी की जरूरत होती है, लेकिन मौसम की बेरुखी ने खेतों को सूखा बना दिया था. कई जगहों पर किसानों ने निजी पंपसेट के सहारे किसी तरह धान की फसल को बचाने की कोशिश की, लेकिन डीजल और बिजली के खर्च ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी थी.

भगवानपुर हाट. पिछले कई हफ्तों से बारिश न होने के कारण पूरे इलाके के किसान चिंता में थे. धान की रोपनी के बाद लगातार पानी की जरूरत होती है, लेकिन मौसम की बेरुखी ने खेतों को सूखा बना दिया था. कई जगहों पर किसानों ने निजी पंपसेट के सहारे किसी तरह धान की फसल को बचाने की कोशिश की, लेकिन डीजल और बिजली के खर्च ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी थी. रविवार से रुक रुककर हो रही झमाझम बारिश किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं रही. बारिश से खेतों में पानी तो नहीं भरा हैं, लेकिन धान की फसल को संजीवनी मिल गई. किसान अब पहले से ज्यादा जोश और उत्साह से खेतों में काम में जुट गए हैं. किसान मनोज कुमार ने बताया कि अगर यह बारिश नहीं होती, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती. बारिश के बाद गांवों में एक नई उमंग देखने को मिल रही है. खेतों में नमी के साथ ही हरियाली लौट आई है और किसान अपने कार्यों में व्यस्त हो गए हैं. अब उन्हें अच्छी उपज की उम्मीद है. किसान नसीम का कहना है कि सरकार को भी अब उर्वरक और कीटनाशक की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, ताकि समय पर दवा और खाद मिल सकें. किसान पप्पू कुमार ने कहा की मौसम ने काफी दिक्कत दी, लेकिन जैसे-तैसे बुआई कर पाए हैं. अगर समय पर बारिश होती रही तो फसल ठीकठाक हो जाएगी. कुल मिलाकर इस बारिश ने सिर्फ खेतों की प्यास नहीं बुझाई, बल्कि किसानों के मन में नई उम्मीदें भी जगा दी हैं. अब सबकी नजरें आगे आने वाले मौसम पर टिकी हैं, ताकि फसल सही समय पर तैयार हो और अच्छी पैदावार के साथ अच्छी आमदनी मिल सके.

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Author: DEEPAK MISHRA

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