किसान 200 रुपये प्रति घंटे की दर से खरीद रहे पानी

खरीफ सीजन आया तो नहरों ने साथ नहीं दिया. बीज डालने व बचाने के लिए किसान 200 रुपये घंटे की दर से पानी खरीदने को विवश हैं. धान के बीज की नर्सरी समय से तैयार करने के लिए किसान जद्दोजहद में जुटे हैं. किसानों के पास अब केवल एक विकल्प है- बोरिंग मशीन या डीजल पंप. विपरीत परिस्थितियों में भी धान के बीज की नर्सरी तैयार करने को कमर कसे किसान बेबस हो जेब ढीली कर रहे हैं.

प्रतिनिधि, महाराजगंज. खरीफ सीजन आया तो नहरों ने साथ नहीं दिया. बीज डालने व बचाने के लिए किसान 200 रुपये घंटे की दर से पानी खरीदने को विवश हैं. धान के बीज की नर्सरी समय से तैयार करने के लिए किसान जद्दोजहद में जुटे हैं. किसानों के पास अब केवल एक विकल्प है- बोरिंग मशीन या डीजल पंप. विपरीत परिस्थितियों में भी धान के बीज की नर्सरी तैयार करने को कमर कसे किसान बेबस हो जेब ढीली कर रहे हैं. प्रखंड में करीब 10800 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य है. बताया जाता है कि इतने आच्छादन के लिए करीब 252 एकड़ में बीज की नर्सरी तैयार करनी होगी. इतना बीज डालने में लाखों रुपये का खर्च आयेगा. देवरिया महुआरी के किसान संजय सिंह ने बताया कि एक एकड़ की नर्सरी से 40 हेक्टेयर खेत में धान का आच्छादन हो सकेगा. उन्होंने बताया कि एक एकड में बीज डालने में 20 से 25 हजार रुपए खर्च का अनुमान है. बिचड़े तैयार करने में कई बार पटवन के पानी का खर्च अलग है. किसान खेतों में पानी लेने के लिए लगा रहे हैं नंबर किसान महंगे दाम पर मार्केट से बीज खरीद रहे हैं. 60-70 रुपये किलो साधारण बीज व उच्च प्रभेदों के धान के बीज का रेट 100-120 रुपए प्रति किलो से अधिक है. मार्केट में धान के विभिन्न प्रभेदों के बीज उपलब्ध हैं. पर महंगा होने के कारण किसानों की जेब ढीली हो रही है. उधर धान के बीज की नर्सरी तैयार करने के लिए पानी आवश्यक है. हर किसान के पास निजी बोरिंग मशीन या डीजल पंप सेट नहीं है. ऐसे में जिन किसानों के पास पटवन के पानी का साधन है, उनके यहां किसान नंबर लगा रहे हैं. किसानों ने बताया कि एक बीघे के पटवन में पांच से छह घंटे का समय लग रहा है. अगर नहर में पानी आया होता तो किसानों को पानी खरीदने के झंझट से मुक्ति मिल गई होती. किसान हैं परेशान सिकटिया के किसान महेंद्र यादव, सत्येंद्र सिंह, बिजेंद्र यादव ने बताया कि एक बीघे में बीज डालने में बीज, खाद, जुताई, पानी व मजदूरी पर दस हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे. इधर किसान दिन-रात बोरिंग मशीन व डीजल पंप चला खेतों में पानी भर रहे हैं. फिर ट्रैक्टर से जुताई कर बीज डालने लायक खेत की तैयारी कर रहे हैं. इस कोशिश में किसान अपने परिश्रम से तीखी धूप व सिस्टम दोनों को हरा रहे हैं. किसानों का कहना है कि अभी भी बीज डालने की प्रक्रिया में किसान जुटे हैं. जिन्होंने बीज डाल दिया है उन्हें भी प्रचंड धूप से बीज बचाने के लिए पानी भरने की जद्दोजहद से निपटना पड़ रहा है.

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Author: DEEPAK MISHRA

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