सीवान: राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, सीवान के विद्युत अभियंत्रण विभाग की ओर से बुधवार को 'तृतीय विश्व में ऊर्जा एवं पर्यावरण संबंधी चुनौतियां तथा सतत विकास हेतु उनके संभावित समाधान' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम हाइब्रिड मोड यानी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित हुआ. इसमें देशभर के शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया.
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता शिक्षाविद् एवं ऊर्जा विशेषज्ञ, आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक तथा वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) डीपी कोठारी रहे. उन्होंने ऊर्जा एवं पर्यावरण से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला.
प्रो. कोठारी ने विद्यार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है.
वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देते हैं ऐसे आयोजन : प्राचार्य
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सूर्यकांत सिंह के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी की संयोजक डॉ. नीवातिका वर्मा थीं. प्राचार्य डॉ. सूर्यकांत सिंह ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान और नवाचार की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं.
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बनेगी. उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा के क्षेत्र में नयी तकनीकों एवं शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया.
ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से शामिल हुए प्रतिभागी
संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थियों के साथ विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सहभागिता की. कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया.
आयोजन का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करना रहा. अंत में मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) डीपी कोठारी सहित सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया.
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