दो इओ ने अपनों को बांट दी 1600 से अधिक योजनाएं

शहरमें निर्माण कार्य के नाम पर अपने चहेतों को लाभान्वित करने की पूर्व के दो कार्यपालक पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत अब पटना के अफसरों तक पहुंच गयी है.डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारियों मनीष कुमार और अरविंद कुमार सिंह के कार्यकाल के दौरान बिना समुचित राशि आकलन के 1600 से अधिक योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने का मामला सामने आने पर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है.जिसके बाद यह माना जा रहा है कि तत्कालीन दोनों इओ के अलावा उनके चहेते कर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है.

प्रतिनिधि,सीवान. शहरमें निर्माण कार्य के नाम पर अपने चहेतों को लाभान्वित करने की पूर्व के दो कार्यपालक पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत अब पटना के अफसरों तक पहुंच गयी है.डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारियों मनीष कुमार और अरविंद कुमार सिंह के कार्यकाल के दौरान बिना समुचित राशि आकलन के 1600 से अधिक योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने का मामला सामने आने पर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है.जिसके बाद यह माना जा रहा है कि तत्कालीन दोनों इओ के अलावा उनके चहेते कर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है. प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि इन योजनाओं में न तो पर्याप्त वित्तीय प्रावधान था और न ही समुचित प्रक्रिया का पालन किया गया.डीएम ने संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने की अनुशंसा की है.जांच में यह भी पाया गया कि बड़ी योजनाओं को तोड़-मरोड़ कर छोटे-छोटे कार्यों के रूप में प्रस्तुत किया गया ताकि प्रशासनिक स्वीकृति आसानी से प्राप्त की जा सके.कई मामलों में कथित रूप से चहेते ठेकेदारों से काम कराकर भुगतान कराया गया. इससे सरकारी राशि के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने की आशंका जताई गई है.अधिकांश योजनाओं की गुणवत्ता भी बेहद खराब पाई गई है.कई स्थानों पर निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं मिले. इस संबंध में कई लोगों ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई थी.जिसके बाद पूरे मामले की गहन समीक्षा शुरू की गई. इधर डीएम के द्वारा पत्र लिखे जाने के बाद तरह-तरह की चर्चा भी हो रही है और नगर विकास एवं आवास विभाग से पूरे मामले की गहनता से जांच की मांग हो रही है.सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि जब योजनाओं को स्वीकृति दी गई थी, उस समय इतनी बड़ी संख्या में कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध ही नहीं थी.इसके बावजूद योजनाओं को मंजूरी देकर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नगर निकाय से जुड़ी शिकायतों पर विशेष नजर रखी जा रही है. हर शिकायत की जांच कराई जा रही है और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.प्रशासन का कहना है कि शहर के विकास के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकारी धन के दुरुपयोग पर सख्त कदम उठाए जाएंगे.

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Published by: Deepak mishra

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