सीवान में सीताराम येचुरी को किया गया याद, सीपीआइएम नेताओं ने विचारों और संघर्ष को दी श्रद्धांजलि

सीपीआइएम ने पूर्व महासचिव सीताराम येचुरी की द्वितीय पुण्यतिथि पर श्रीनगर में एक स्मृति सभा का आयोजन किया. इस दौरान उनके विचारों और राष्ट्र-समाज के लिए किए गए योगदान को याद किया गया.

Memorial Meet: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीआइएम) के पूर्व महासचिव सीताराम येचुरी की द्वितीय पुण्यतिथि पर रविवार को पार्टी कार्यालय न्याय मार्ग, श्रीनगर स्थित शिव पूजन सिंह भवन में स्मृति सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ दयानंद सिंह ने की.

कार्यक्रम की शुरुआत सीताराम येचुरी के तैल चित्र पर जिला सचिव और अध्यक्ष द्वारा माल्यार्पण के साथ हुई. इसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.

जनवादी गीत के माध्यम से दी श्रद्धांजलि

इस अवसर पर कमलेश्वर ओझा ने सीताराम येचुरी को समर्पित जनवादी गीत प्रस्तुत किया. गीत के माध्यम से उन्होंने एकजुट होकर संघर्ष करने का संदेश दिया. कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी येचुरी के विचारों और उनके राजनीतिक जीवन को याद किया.

वक्ताओं ने येचुरी के योगदान को किया याद

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ दयानंद सिंह ने कहा कि सीताराम येचुरी बेहद कुशाग्र बुद्धि के व्यक्ति थे. वे चाहते तो आला अधिकारी बन सकते थे, लेकिन उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा कि येचुरी ने मृत्यु के बाद अपना शरीर भी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया, ताकि चिकित्सकीय शोध में उसका उपयोग हो सके.

पूर्व जिला सचिव अर्जुन यादव ने कहा कि आज देश में चौतरफा भय का माहौल है. इसके खिलाफ संघर्ष के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है.

वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह ने कहा कि सत्ता में मौजूद पार्टी की अपनी विचारधारा है. उसका मुकाबला अकेले नहीं किया जा सकता. सीताराम येचुरी ने इसे समझा और तमाम विपक्षी दलों को एकजुट करने की सफल कोशिश की.

मार्कंडेय ने कहा कि ट्रेड यूनियन और किसान यूनियन लगातार मजदूरों और किसानों के हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसमें उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है.

पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लिया हिस्सा

स्मृति सभा को युगल किशोर दूबे, अरुण कुमार सिंह, परमा चौधरी, श्रीभगवान चौबे, गणेश राम, डॉ जगन्नाथ प्रसाद और योगेंद्र सिंह समेत अन्य नेताओं ने संबोधित किया.

कार्यक्रम को सफल बनाने में कन्हैया चौधरी, दया शंकर द्विवेदी, बिपिन बिहारी सिंह, उमा शंकर साह, सीत लाल राम, राम लगन राम और भोगेंद्र झा की प्रमुख भूमिका रही.

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By Vivek Kumar

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