Siwan News : भगवानपुर हाट प्रखंड की मीरजुमला पंचायत स्थित सकड़ी मोड़ के पास गंडकी नदी पर बना पुल पिछले दो वर्षों से ध्वस्त पड़ा है. पुल टूटने के बाद ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर नदी के बीच अस्थायी डाइवर्सन बनाकर आवागमन शुरू कराया था, लेकिन रविवार को नदी में आई तेज धारा उसे भी बहाकर ले गई. इसके बाद एक बार फिर दोनों किनारों के बीच आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है.
पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर लोग
डाइवर्सन बह जाने के बाद अब लोगों को एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. इससे रोजमर्रा के कार्य, खेती-बारी, बाजार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है.
दो साल पहले ध्वस्त हुआ था पुल
ग्रामीणों के अनुसार करीब दो वर्ष पहले नदी की सफाई के दौरान पुल ध्वस्त हो गया था. इसके बाद अब तक पुल का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया. आवागमन बनाए रखने के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर चंदा जुटाकर अस्थायी डाइवर्सन तैयार किया था, लेकिन बरसात की तेज धारा उसे भी बहाकर ले गई.
दर्जनभर गांवों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटने से एक दर्जन से अधिक गांवों का आपसी संपर्क प्रभावित हो गया है. किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने, छात्रों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल ले जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसका असर क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है.
जनप्रतिनिधियों पर लगाया उपेक्षा का आरोप
स्थानीय ग्रामीण शेखर कुशवाहा, डॉ. सुगेन सिंह, दिनेश प्रसाद कुशवाहा और बबन तिवारी ने बताया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विधायक हेमनारायण साह, पूर्व विधायक विजय शंकर दुबे तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय पुल निर्माण का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन बाद में समस्या को भुला दिया जाता है.
ग्रामीणों ने की तत्काल पुल निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अविलंब अस्थायी आवागमन की व्यवस्था कराने तथा स्थायी पुल निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्र के लोगों को वर्षों से चली आ रही इस समस्या से राहत मिल सके.
