सुरैला चंवर में बनेगा पक्षी अभयारण्य

जिले की आर्द्रभूमियों में एक बार फिर पक्षियों की चहचहाहट लौट आयी है. एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत करायी गयी पक्षी गणना में पचरूखी प्रखंड के सुरैला चौर, गुठनी प्रखंड के चकरी ताल, सिसवन के घाघरा नदी और सिसवन प्रखंड के महेंद्र नाथ मंदिर स्थित कमलदाह सरोवर में बड़ी संख्या में प्रवासी और देशी जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है. गणना के दौरान जिले में कुल 2940 प्रवासी पक्षी रिकॉर्ड किए गए.जो यह संकेत देते हैं कि जिले की जलवायु और आर्द्रभूमियां पक्षियों के लिए अनुकूल बनी हुई हैं.

विवेक कुमार सिंह, सीवान. जिले की आर्द्रभूमियों में एक बार फिर पक्षियों की चहचहाहट लौट आयी है. एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत करायी गयी पक्षी गणना में पचरूखी प्रखंड के सुरैला चौर, गुठनी प्रखंड के चकरी ताल, सिसवन के घाघरा नदी और सिसवन प्रखंड के महेंद्र नाथ मंदिर स्थित कमलदाह सरोवर में बड़ी संख्या में प्रवासी और देशी जलपक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है. गणना के दौरान जिले में कुल 2940 प्रवासी पक्षी रिकॉर्ड किए गए.जो यह संकेत देते हैं कि जिले की जलवायु और आर्द्रभूमियां पक्षियों के लिए अनुकूल बनी हुई हैं. सर्वेक्षण में सामने आये आंकड़ों और जैव विविधता को देखते हुए गुठनी प्रखंड के चकरी ताल को वेटलैंड पार्क के रूप में विकसित करने तथा पचरुखी प्रखंड के सुरैला चौर को पक्षी अभयारण्य घोषित करने की सिफारिश की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और प्रबंधन किया जाए तो आने वाले वर्षों में यहां प्रवासी पक्षियों की संख्या और बढ़ सकती है.पक्षी गणना के दौरान सुरैला चौर, चकरी ताल, घाघरा नदी और कमलदाह सरोवर में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को देखा गया वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ये आर्द्रभूमियां न केवल पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल हैं बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं.रिपोर्ट में संरक्षण के साथ-साथ आधारभूत संरचना के विकास पर भी जोर दिया गया है ताकि प्रकृति और पर्यटन दोनों को संतुलित रूप से बढ़ावा मिल सके. मिला गड़वाल बतख, गौ बगुला, गणना के दौरान मिले पक्षियों में कम सीटीदार बतख, गड़वाल बतख, गौ बगुला, धूसर सिर वाली जलमुर्गी, छोटा बगुला, छोटा जलकौआ, मध्यम बगुला, बड़ा जलकौआ, यूरेशियन कूट (जलमुर्गी), लाल कलगी वाली बतख, नदी टिटिहरी और सफेद गला रामचिरैया आदि शामिल है. चकरी ताल में नो डंपिंग नीति लागू करने की सिफारिश, चकरी ताल को प्रदूषण से बचाने के लिए नो डंपिंग नीति लागू किए जाने की सिफारिश के साथ एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के तहत जिले में कराई गई पक्षी गणना के अहम आंकड़े सामने आए हैं. सर्वेक्षण के दौरान सिसवन प्रखंड के महेंद्रनाथ मंदिर स्थित कमलदाह सरोवर में 11 विभिन्न परिवारों से संबंधित कुल 31 प्रजातियों के 2042 पक्षी पाए गए. इनमें फेरुजिनस डक, जिसे व्हाइट-आइड पोचार्ड भी कहा जाता है प्रमुख रूप से शामिल है.इस प्रजाति को आइयूसीएन द्वारा ‘निकट संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा गया है.सर्वेक्षण में इसकी संख्या पिछली गणना की तुलना में बेहतर पायी गई. पचरुखी प्रखंड के सुरैला चौर में 17 विभिन्न परिवारों की 30 प्रजातियां दर्ज की गईं. गुठनी प्रखंड के चकरी ताल में 14 परिवारों की 27 प्रजातियां पाई गईं, जहां प्रदूषण रोकने के लिए नो डंपिंग नीति लागू करने की अनुशंसा की गई है. इसके अलावा घाघरा नदी में 9 परिवारों की 13 प्रजातियां दर्ज की गईं, जो नदीय जैव विविधता की मौजूदगी को दर्शाती हैं. वन विभाग की रिपोर्ट में उठे अहम मुद्दे वन विभाग की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में जिले की प्रमुख आर्द्रभूमियों की हालत पर साफ तौर पर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक पचरुखी प्रखंड के सुरैला चौर में पक्षियों के रहने लायक माहौल बनाए रखने के लिए आवास प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं की तुरंत जरूरत है. देखरेख नहीं होने से यहां पक्षियों पर असर पड़ रहा है.वहीं गुठनी प्रखंड के चकरी ताल में ठोस कचरा प्रबंधन लागू करने और समय-समय पर झाड़ियों व अतिरिक्त वनस्पतियों की सफाई जरूरी बताई गई है ताकि तालाब गंदगी से बचा रहे. सिसवन प्रखंड के मेहदार स्थित महेंद्रनाथ मंदिर के कमलदाह सरोवर में भी पानी की नियमित सफाई और वनस्पतियों के सही प्रबंधन पर जोर दिया गया है जिससे पक्षियों के लिए अनुकूल माहौल बना रहे.रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इसी इलाके से गुजरने वाली घाघरा नदी में मानव गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं. इससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है और इसका नकारात्मक असर वन्य जीवों पर साफ दिखाई दे रहा है. पक्षियों की गणना करने में यह टीम थी शामिल एशियाई जलपक्षी गणना के दौरान सीवान व गोपालगंज जिले में एक विशेष विशेषज्ञ टीम ने सर्वेक्षण कार्य को अंजाम दिया. यह गणना वन विभाग के तत्वावधान में वन प्रमंडल पदाधिकारी मेघा यादव एवं पटना विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शहला यास्मीन के नेतृत्व में की गई. सर्वेक्षण दल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया से प्रोजेक्ट ऑफिसर अहबर आलम, इकोवाइल्ड बायोलॉजिस्ट मोहम्मद शाहबाज, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के कंसल्टेंट अरुण चौधरी तथा अनिल थप्पा शामिल रहे.वन विभाग द्वारा इस तरह की गणना को लेकर पहले से ही विस्तृत योजना तैयार की गई थी.जिसके तहत समयबद्ध तरीके से यह सर्वेक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका. सर्वेक्षण के दौरान पक्षियों की पहचान और सटीक गणना के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया. इसमें दूरबीन, डीएसएलआर कैमरा तथा पक्षी पहचान मार्गदर्शिका प्रमुख रूप से शामिल रहे. विशेषज्ञों की टीम द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण से जिले की जैव विविधता को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है. गोपालगंज में सर्वेक्षण में करीब 26 प्रजातियों के 339 से अधिक पक्षी देखे गए. गोपालगंज जिले में एशियाई जलपक्षी गणना के तहत गंडक नदी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया गया.इस दौरान जिले में जलपक्षियों की उल्लेखनीय मौजूदगी दर्ज की गई. सर्वेक्षण में करीब 26 प्रजातियों के 339 से अधिक पक्षी देखे गए. जिससे यह स्पष्ट होता है कि गोपालगंज की जलवायु और नदीय क्षेत्र पक्षियों के लिए अनुकूल हैं. जिनमें कई प्रवासी और देशी जलपक्षी शामिल हैं. इसके अलावा सर्वेक्षण के दौरान 6 गंगा डॉलफिन और 9 घड़ियाल भी देखे गए. विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलफिन और घड़ियाल की मौजूदगी गोपालगंज जिले में घड़ियाल सैंक्चुअरी और इको-टूरिज्म की बेहतर संभावनाओं की ओर इशारा करती है. वहीं भारतीय टेंट कछुआ की 18 संख्या का रिकॉर्ड होना नदी की जैव विविधता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. बोलीं अधिकारी जिले में एशियाई जलपक्षी गणना कराई गई है, जिसमें आर्द्रभूमियों की अच्छी स्थिति सामने आई है. गुठनी प्रखंड के चकरी ताल को वेटलैंड पार्क के रूप में विकसित करने और पचरुखी प्रखंड के सुरैला चौर को पक्षी अभयारण्य घोषित करने की सिफारिश की गई है.इसके साथ ही चकरी ताल को प्रदूषण से बचाने के लिए वहां नो डंपिंग नीति लागू करने का भी सुझाव दिया गया है.इन कदमों से जैव विविधता का संरक्षण होगा और भविष्य में प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. मेघा यादव,वन प्रमंडल पदाधिकारी

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By DEEPAK MISHRA

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