तप रहा है आषाढ़ ,गर्मी से नहीं मिल रही राहत

तीखी धूप व बढ़ते पारे से आषाढ़ में जेठ महीने का अहसास हो रहा है. पिछले 10- बारह दिनों से बारिश नहीं होने के कारण पारा सिर चढ़कर बोल रहा है. दिनभर तेज धूप रहने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है. खेत में नमी नही होने के कारण किसान धान की रोपनी से परहेज कर रहे है.

प्रतिनिधि, सीवान. तीखी धूप व बढ़ते पारे से आषाढ़ में जेठ महीने का अहसास हो रहा है. पिछले 10- बारह दिनों से बारिश नहीं होने के कारण पारा सिर चढ़कर बोल रहा है. दिनभर तेज धूप रहने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है. खेत में नमी नही होने के कारण किसान धान की रोपनी से परहेज कर रहे है. जिले में धान की बुआई नहीं होने से चिंता बढ़ने लगी है. बारिश के अभाव में गांवों में सन्नाटा है. अधिकांश कारोबार ग्रामीण ग्राहकी पर टिका है. गत सप्ताह से ग्रामीण ग्राहकी घटकर आधी रह गई है. तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने से दोपहर में गर्मी से लोग हलकान हो रहे है. रविवार को अधिकतम 38 डिग्री व न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा. पिछले साल से आषाढ़ माह में अच्छी वर्षा हुई थी. जबकि इस बार सूखे की आशंका लोगों को सता रही है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून में देरी का प्रभाव जिले की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.खरीफ सत्र की बुआई में देरी से फसलों का उत्पादन कम होगा. दैनिक मजदूरों व बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें प्रचंड गर्मी के कारण दैनिक मजदूरों , कामकाजी महिलाओं व बुर्जुगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई है. दैनिक मजदूरी करनेवाले, रिक्शा चालकों व कार्यालय कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्हें काम करने में परेशानी हो रही है. वहीं गर्मी के चलते पर्याप्त काम भी नही मिल रहा है. जिससे उनके समक्ष भुखमरी की समस्या खड़ी हो गयी है. दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है. बढ़ती गर्मी के कारण बाजार में मौसमी फल, शीतल पेय, लस्सी, खीरा आदि की बिक्री काफी बढ़ गई है.लोग गर्मी से निजात पाने के लिए इसका खूब सेवन करने लगे हैं. तेज धूप व गर्म हवा से फसलों को पहुंच सकता है नुकसान मौसम में हो रहे बदलाव से एक ओर जहां तेज धूप से गर्मी बढ़ने लगी है, वहीं खेती-किसानी पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने लगा है. तेज धूप से खेतों की नमी भी कम होने लगी हैं.इसे लेकर किसानों में चिंता बनी हुई है. किसान विजय यादव,अजय यादव, योगेन्द्र शर्मा,रामाशीष सिंह आदि ने बताया कि बताया कि यह समय खरीफ फसम लगाने का है. तेज धूप व गर्म हवा के चलते फसल की बुआई नही हो रही है.प वर्षा कम होने के चलते खेतों की जुताई प्रभावित हुई है. किसान हिम्मत करके धान के बिचड़े गराए है, वे झुलस रहे है.अगर मौसम का रूख इसी तरह रहा तो पैदावार पर प्रतिकूल पड़ेगा. यदि मौसम इसी तरह चलता रहा, तो हम किसानों के सामने आर्थिक समस्या भी खड़ी हो सकती है. भीषण गर्मी से बीमार होने लगे लोग भीषण गर्मी का सीधा असर लोगों के शरीर पर पड़ रहा है. गर्मी बढ़ते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है. मौसम में बदलाव के साथ ही उल्टी-दस्त व पेट दर्द की बीमारी ने दस्तक दे दी है. गर्मी से उल्टी-दस्त, पेट दर्द के साथ ही डायरिया ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं.चिकित्सकों की माने तो डायरिया एक जल जनित बीमारी है. गर्मी बढ़ते ही लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए कहीं से भी खरीदकर पानी पीना शुरू कर देते हैं. इसके अलावा टैंकरों व सप्लाई का पानी भी कई बार खराब आ जाता है. इसलिए लोगों को इस मौसम में हमेशा साफ पानी या पानी को उबाल कर ही पीना चाहिए. वही गर्मी का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ रहा है. गर्मी के कारण बुखार, उल्टी दस्त, बुखार, पेट में दर्द, सांस की बीमारी आदि रोग बच्चों में हो रहे हैं. ज्यादातर बच्चे उल्टी दस्त के अलावा वायरल फीवर से भी परेशान हो रहे हैं. रोजाना 8-10 बच्चे सरकारी अस्पताल में गर्मी से होने वाली बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं. इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीज उपचार करा रहे हैं.

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Author: DEEPAK MISHRA

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