सीवान: बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अनिल कुमार पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक लापरवाही और पटना हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामलों में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें वर्तमान पद से हटाने की अनुशंसा की गयी है. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है.
जांच में सामने आया कि सीवान जिले के महाराजगंज में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के रूप में पदस्थापना के दौरान उनके कार्यकाल में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं. अनुमंडल कार्यालय के बैंक खाते और रोकड़ बही के मिलान में 25 लाख 92 हजार 417 रुपये का हिसाब स्पष्ट नहीं मिला. इसे गंभीर पर्यवेक्षीय चूक माना गया.
जांच में यह भी पाया गया कि बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए छह प्रखंड स्तरीय अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया, जिससे उन्हें अनावश्यक मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा. वहीं, एक जन वितरण प्रणाली विक्रेता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद उसके लाइसेंस के निलंबन की कार्रवाई करीब 10 दिनों तक लंबित रखी गयी, जिससे सार्वजनिक वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई.
स्पष्टीकरण असंतोषजनक, ‘निंदा’ की सजा
अनुशासनिक प्राधिकार ने अनिल कुमार के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए उन्हें ‘निंदा’ की सजा दी है. साथ ही, उनकी एक वार्षिक वेतनवृद्धि को असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का आदेश जारी किया गया है.
हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का भी आरोप
इधर, बेगूसराय में एसडीओ रहते हुए उन पर पटना हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की अनदेखी करने का भी आरोप है. आरोप है कि रैयती भूमि विवाद में हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था. इसके बावजूद 18 जनवरी को दखल-कब्जे की कार्रवाई करायी गयी.
इस मामले में बेगूसराय के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत आठ अधिकारियों को अवमानना याचिका का सामना करना पड़ा.
सरकार को भेजी गयी कार्रवाई की अनुशंसा
महाधिवक्ता की समीक्षा बैठक में इस पूरे प्रकरण को बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रतिकूल माना गया. इसके बाद जिला प्रशासन ने सरकार को पत्र भेजकर अनिल कुमार को तत्काल एसडीओ पद से मुक्त करने की अनुशंसा की है.
सरकार ने संकेत दिया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में नियमों के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
