हर 48 घंटे में जल जा रहा है एक ट्रांसफॉर्मर

गर्मी शुरू होते ही शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती की समस्या बढ़ने लगी है.जहां एक और बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी और समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण ट्रांसफॉर्मर जलने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं, ताजा आंकड़ों के मुताबिक महाराजगंज अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न प्रखंडों में अप्रैल में अब तक 17 ट्रांसफॉर्मर जल चुके है, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा है.

प्रतिनिधि, महाराजगंज .गर्मी शुरू होते ही शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती की समस्या बढ़ने लगी है.जहां एक और बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी और समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण ट्रांसफॉर्मर जलने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं, ताजा आंकड़ों के मुताबिक महाराजगंज अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न प्रखंडों में अप्रैल में अब तक 17 ट्रांसफॉर्मर जल चुके है, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा है. जनवरी में अनुमंडल भर में 13 ट्रांसफॉर्मर जलने की घटना सामने आयी. फरवरी में 10 और मार्च में 12 ट्रांसफॉर्मर जले. अप्रैल में अभी 12 दिन बाकी है लेकिन 17 ट्रांसफॉर्मर जल चुके है. ट्रांसफॉर्मर जलने का मुख्य कारण बताया जा रहा है कि एक तरफ गर्मी बढ़ने के कारण लोड बढ़ गया है.तो ठनका गिरने से भी ट्रांसफॉर्मर जले हैं.वही दूसरी तरफ जिस ट्रांसफॉर्मर में तेल की कमी है. वैसे ट्रांसफॉर्मर भी जल रहे हैं. ट्रांसफॉर्मर में तेल नहीं डाला जा रहा है. जिस कारण उनके जलने का सिलसिला जारी है. प्रभावित इलाकों में बिजली संकट ट्रांसफॉर्मर जलने की घटनाएं शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हुई है. जिन क्षेत्रों में ट्रांसफॉर्मर खराब हो जाते उन इलाकों में कभी पांच घटे तो कभी 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, गर्मी के इस मौसम में बिजली कटौती ने आमजन को परेशान कर दिया है. व्यापारी वर्ग भी इससे खासा प्रभावित हुआ है. विभाग को माने तो शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे में और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन दिन में खराब ट्रांसफॉर्मर को बदल दिया जाता है. शहरी क्षेत्र में तो 24 घंटे में ट्रांसफॉर्मर बदल दिया जाता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ट्रांसफॉर्मर खराब होने के बाद विभाग का चक्कर लगाना पड़ता है. यही नहीं बढ़ती गर्मी को देखते हुए ओवरलोड के नाम पर कहीं चार घंटे तो कहीं आठ घंटे बिजली काट दिया जाता है.बसंतपुर फीडर में अधिकांश समय चार से छह घंटे तक बिजली गुल रहती है. लोड के दबाव से जल रहे ट्रांसफॉर्मर हर साल गर्मी के मौसम में बिजली की खपत में जाफा हो जाता है. कूलर, एयर कंडीशनर और अन्य बिजली उपकरणों के उपयोग से ट्रांसफॉर्मर पर लोड बढ़ने लगता है. इस बार भी अप्रैल के शुरुआती दिनों में तापमान ने 40 डिग्री के करीब दस्तक दे दी है, जिससे बिजली की मांग में विभागीय सूत्रों की माने तो करीब 30 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन ट्रांसफार्मरों की समय पर जांच और मेंटेनेंस नहीं हो रहा. मेंटेनेस नहीं हो पाने से कई इलाकों में ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जलने लगे हैं. मेंटेनेंस में बरती जा रही लापरवाही बिजली कंपनी द्वारा हर साल गर्मी शुरू होने से पहले ट्रासफॉर्मरों की क्षमता जाव, तेल की स्थिति और कनेक्शन की कसावट आदि का मेंटेनेंस कार्य किया जाना चाहिए, लेकिन इस बार कई इलाको में यह काम या तो आधा-अधूरा हुआ या फिर हुआ ही नहीं. इसका नतीजा यह रहा कि लोड बढ़ते ही ट्रांसफॉर्मर ने जवाब देना शुरू कर दिया बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत के बाद भी ट्रांसफॉर्मर की जांच नहीं कराई जाती. बोले कार्यपालक अभियंता गर्मी में लोड बढ़ने और कुछ ट्रांसफॉर्मरों के ओवरलोड हो जाने के कारण जलने की घटनाएं हुई है, हमारी टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही है. जहां भी ट्रांसफॉर्मर खराब होने की सूचना मिल रही है, वहां तुरंत ट्रांसफॉर्मर बदलने या सुधारने का काम किया जा रहा है. आने वाले दिनों में मेंटेनेंस कार्य को और तेज किया जाएगा प्रशांत कुमार पंडित, कार्यपालक अभियंता , महाराजगंज

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Author: DEEPAK MISHRA

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