महाराजगंज : शहर के सिंहौता स्थित रामेश्वरम धाम मंदिर प्रांगण में भागवत कथा के छठें दिन नारी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रवचनकर्ता शीघ्रता साध्वी ने कहा कि भगवान शंकर ने महर्षि गर्ग से कहा है.
जिस घर में सर्वगुणसंपन्ना नारी सुखपूर्वक निवास करती है उस घर में लक्ष्मी निवास करती है. कोटि देवता भी उस घर को नहीं छोड़ते हैं. नारी का हृदय कोमल और स्निग्ध हुआ करता है. इसी वजह से वह जगत की पालक, माता के स्वरूप में हमेशा स्वीकारी गयी है. जन्मदाता और पालनकर्ता होने के कारण सब पूज्यों में पूज्यतम जननी है नारी.
भारतीय समाज में नारी का एक विशिष्ट व गौरवपूर्ण स्थान है. वह भोग्या नहीं है बल्कि पुरुष को भी शिक्षा देने योग्य है. अगर वह अपने चरित्र और साधना में दृढ़ तथा उत्साही बन जाये, तो अपने माता, पिता, पति, सास का भी उद्धारक हो सकती है. धर्म की स्थापना भले आचार्यों ने की हो पर उसे संभाले रखना, विस्तारित करना और बच्चों में उसके संस्कारों का सिंचन करना इन सबका श्रेय नारी को ही जाता है.
भारतीय संस्कृति ने स्त्री को माता के रूप में स्वीकार किया है. नारी-पुरुष के कामोपभोग की सामग्री नहीं बल्कि वंदनीय, पूजनीय है. मधुर वाणी बोलने का जिसमें गुण हो वह पतिसेवा-परायण श्रेष्ठ नारी इस पृथ्वी को पवित्र करती है. कथा के बीच-बीच में भक्ति संगीत की प्रस्तुति भी की गयी जिसका श्रोताओं ने भरपूर आनंद उठाया.
