लकड़ीनबीगंज : प्रखंड के मदारपुर गांव स्थित तालाब में डूबने से तीन किशोरों की मौत हो गयी. जिस समय परिजन व ग्रामीण उन्हें स्थानीय अस्पताल पहुंचे वे अचेतावस्था में थे. उन्हें समय से इलाज नहीं मिला और उनकी मौत हो गयी. इस घटना के बाद परिजनों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया.
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल मुआवजा देते हुये दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की. मृतकों में मदारपुर गांव के राजकुमार पंडित का बेटा राजन, रामबाबू सिंह का बेटा बंटी व भगवानपुर थाना क्षेत्र के महम्मदा गांव के नरेश पंडित का बेटा दीपू पडित शामिल हैं.
वहीं लोगों को कहना था कि भगवान की लीला भी अजीब है जो दोस्त बचपन से एक साथ खेले, एक साथ पढ़े और अब उनकी एक साथ ही मौत हो गयी. क्षेत्र में एक किसी के जुबान पर इसी बात की चर्चा हो रही थी.ग्रामीणों ने बताया कि दीपू रिश्तेदारी में मदारपुर गांव में चार दिन पहले आया था. प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतकों में एक बच्चा पैर फिसलने से गड्ढ़े में जा गिरा.
इस दौरान पीछे से आ रहे दोनों बच्चें ने उसे बचाने का प्रयास किया और वे भी जा गिरे. तीनों पानी में डूबने लगे. ग्रामीण जब तक पहुंचते वे अचेत हो चुके थे. तीनों को स्थानीय अस्पताल लाया गया. जहां डॉक्टर व अन्य कर्मियों के नहीं रहने की वजह से तीनों बच्चों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद बच्चों के परिजन समेत स्थानीय ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बच्चों की मौत का जिम्मेदार ठहराया है.
स्वास्थ्यकर्मियों के विरोध में आक्रोशित ग्रामीण अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गये. सूचना के बाद नबीगंज प्रमुख प्रतिनिधि नरेंद्र सिंह, रमेश कुमार सिंह, राजेश्वर प्रसाद, मैनेजर यादव, राजनारायण सिंह, रामनाथ सिंह, देवईश्वर मांझी भी पीएचसी की बदइंतजामी को देख आक्रोशित लोगों के साथ धरना में शामिल हो गये.
इधर जानकारी मिलने पर सीओ मिथिलेश सिंह व ओपी प्रभारी पन्ना लाल यादव ने मौके पर पहुंच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर आक्रोशित ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया परंतु आक्रोशित मानने को तैयार नहीं थे.
सूचना पर पहुंचे महाराजगंज के एसडीओ मंजीत कुमार व एसडीपीओ हरीश शर्मा घटना की सूचना पर नबीगंज पहुंचे व आक्रोशितों को मुआवजा व नबीगंज पीएचसी में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया.
उसके बाद आक्रोशित लोग शांत कराया. परिजन एसडीओ से रोते हुए बस इसी बात का जिक्र कर रहे थे कि अगर चिकित्सक रहते तो शायद उनके कलेजे के टुकड़े उनकी आंखों के सामने होते. उनकी चित्कार सून उपस्थित लोगों की भी आंखें नम हो जा रही थी. एसडीओ परिजनों को शांत कराते हुये हर संभव मदद का भी आश्वासन दिया.
तीनों ने निभायी दोस्ती, साथी को पानी भरे गड्ढे से निकालने के दौरान तीनों डूबे
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, परिजनों के चीत्कार से वातावरण हुआ शोकाकुल
रोते हुए परिजनों ने एसडीओ से कही अपनी बात, हर संभव मदद का िमला आश्वासन
चिमनी वाले नहीं खोदे रहते गड्ढे तो नहीं होती घटना
नबीगंज के मदारपुर नागा सिंह के टोला के उत्तर दिशा में अवस्थित चिमनी वाले मिट्टी निकालने के लिए अगर गड्ढे नहीं खोदते तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती. साथ ही स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गड्ढे खुदने के बाद भी चिमनी वाले को गड्ढे के पास खतरा होने का निशान लगाना चाहिए था. वहीं कुछ स्थानीय लोग दबी जुबान उक्त चिमनी को अवैध रूप से चलाने की बात कहते हुए खनन विभाग द्वारा इसकी जांच की बात कह रहे थे.
