न यातायात, न है उच्च शिक्षा की व्यवस्था

महाराजगंज : महाराजगंज अनुमंडल स्थापना के 27 साल बाद भी विकास के मामले में उपेक्षित है. महाराजगंज को एक अप्रैल, 1991 को अनुमंडल का दर्जा मिला था. जानकारी के अनुसार महाराजगंज अनुमंडल का उद्घाटन 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था. जिसके बाद 23 साल तक गंडक विभाग के परिसर में अनुमंडल […]

महाराजगंज : महाराजगंज अनुमंडल स्थापना के 27 साल बाद भी विकास के मामले में उपेक्षित है. महाराजगंज को एक अप्रैल, 1991 को अनुमंडल का दर्जा मिला था. जानकारी के अनुसार महाराजगंज अनुमंडल का उद्घाटन 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था. जिसके बाद 23 साल तक गंडक विभाग के परिसर में अनुमंडल का कामकाज चलता रहा. अनुमंडल स्थापना के इतने दिन बाद भी न भवन पूर्ण हो सका है और न ही पदाधिकारियों के लिए आवास ही बन पाया.

अनुमंडल के नजदीक ही पदाधिकारियों के आवास बनाने की योजना है. इसके लिए जगह चिह्नित कर बोर्ड भी लगा दिया गया है. इस बीच 2014 में अनुमंडल को अपना भवन तो मिल गया, लेकिन आवास के अभाव में एसडीओ आज भी गंडक योजना के भवन में रहते हैं.
कई पदाधिकारी दूसरे विभाग के भवनों में रहने को मजबूर है. अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी का आवास व कार्यालय आज भी जर्जर भवन में चलता है. आवास के अभाव में डीसीएलआर किराये के मकान में रहते हैं. पीजीआरओ जिला मुख्यालय में रहते हैं.
पर्याप्त भवन नहीं रहने से कामकाज पर भी असर पड़ता है. अनुमंडल कार्यालय भवन के निर्माण का कार्य 2016 में ही पूरा कर लिया जाना था. इस तीन मंजिला भवन की नींव 2012 में ही रखी गयी थी. अनुमंडल की स्थापना होने पर रामानंद प्रसाद यहां के पहले एसडीओ बने थे.
काफी पुराना है अनुमंडल का इतिहास
गजट के मुताबिक 1991 में महाराजगंज अनुमंडल बना था. कभी सारण प्रमंडल के हिस्सा होने वाले महाराजगंज अनुमंडल में अंग्रेजी हुकूमत के समय थाना चला करता था. कहा जाता है कि महाराजगंज व्यवसाय क्षेत्र में एक अलग ही पहचान थी. लेकिन धीरे-धीरे पहचान समाप्त होती चली गयी. जब 1 अप्रैल 1991 को महाराजगंज, अनुमंडल बना तो यहां के लोगों को एक उम्मीद जागी थी. लेकिन धीरे-धीरे वह उम्मीद भी समाप्त होती चली गयी.

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