यज्ञशाला की परिक्रमा से होती है यश की प्राप्ति

गुठनी : यज्ञ नारायण की परिक्रमा से मनुष्य को जीवन में ऐश्वर्य, ख्याति तथा यश की प्राप्ति होती है. उक्त बातें गुठनी के ममउर गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पंडित नीरज शास्त्री ने कहीं. महायज्ञ परिक्रमा को सबसे पुण्य फलदायी बताते हुए शास्त्री ने कहा कि परिक्रमा में एक-एक पद […]

गुठनी : यज्ञ नारायण की परिक्रमा से मनुष्य को जीवन में ऐश्वर्य, ख्याति तथा यश की प्राप्ति होती है. उक्त बातें गुठनी के ममउर गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पंडित नीरज शास्त्री ने कहीं. महायज्ञ परिक्रमा को सबसे पुण्य फलदायी बताते हुए शास्त्री ने कहा कि परिक्रमा में एक-एक पद की यात्रा से समस्त पापों का नाश होता है. शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि यानि कानि च पापानि जन्मान्तर के जो पाप है वह यज्ञ में मात्र परिक्रमा करने से नष्ट हो जाते हैं.

जन्म-जन्मांतर के ज्ञात-अज्ञात दुख दरिद्र को नष्ट करने का एक मात्र सरल उपाय भगवान यज्ञेश की परिक्रमा है. बहुत से लोग पीपल, तुलसी, केले आदि वृक्षों की परिक्रमा करते हैं क्योंकि वृक्षों में भी देवताओं का वास होता है. ममउर में महायज्ञ की यज्ञशाला परिक्रमा के लिए ममउर, बसुहारी, गुठनी, बलुआ, खिरौली, सेलौर, किसुनपुरा, बरपलिया, तेनुआ, दमोदरा गांव के अलावा दूर इलाकों श्रद्धालुओं की भीड़ आ रही है.

गत से 18 मई तक चलनेवाले इस महायज्ञ के रासलीला में भारतीय संस्कृति पर आधारित देवी- देवताओं की तरह-तरह झांकियां प्रस्तुत हो रही हैं. जो आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. महायज्ञ में प्रवचन कर्ता चक्रपाणी महाराज, जया किशोरी प्रत्येक दिन शाम छह बजे से आठ बजे तक अपने प्रवचन से श्रद्धालुओं को ज्ञान बांट रहे हैं.

यज्ञ के सफल संचालन में यजमान रामाश्रय पांडे, रामचंद्र भारती, हरिवंश यादव, उपेंद्र यादव, फेकू यादव, कार्यकर्ता विशाल, चंदन, हरिकेश, अमित, अनुज, सन्नी, अनुज, रत्नेश, प्रदीप सहित ग्रामीणों का काफी सराहनीय सहयोग मिल रहा है.

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