Sleeper cell investigation: भारत-नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी जिले में देशविरोधी गतिविधियों से जुड़े कथित नेटवर्क का एक बड़ा भंडाफोड़ हुआ है. गाढ़ा थाना क्षेत्र के टकोर गांव से पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो युवकों मोहम्मद अखलाक और मोहम्मद अरमान से पूछताछ के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है. दोनों युवकों के कथित सोशल मीडिया संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की सघन जांच में सुरक्षा एजेंसियों को कई बेहद अहम सुराग हाथ लगे हैं. स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अब केंद्रीय एजेंसियां भी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और इसके पीछे छिपी साजिश को बेनकाब करने में जुट गई हैं.
AK-47 की डीपी वाले व्हाट्सऐप-इंस्टाग्राम ग्रुप से थे जुड़े
गिरफ्तारी के बाद जब प्रभात खबर की टीम दोनों युवकों के पैतृक गांव टकोर पहुंची, तो ग्रामीणों ने कई चौंकाने वाली जानकारियां साझा कीं. ग्रामीणों के अनुसार:
- दोनों युवक कुछ ऐसे संदिग्ध व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम ग्रुपों से जुड़े हुए थे, जिनकी (DP) पर एके-47 (AK-47) जैसे घातक हथियारों की तस्वीरें लगी रहती थीं.
- स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इन्हीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पिछले करीब छह महीने से दोनों युवकों को लगातार प्रभावित करने और कथित तौर पर भारी प्रलोभन देने का प्रयास किया जा रहा था. हालांकि, इन दावों की अभी तक जांच एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़ रहे हैं तार
जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों युवकों के मोबाइल से मिले कथित सोशल मीडिया संपर्क सीधे पाकिस्तान में बैठे राणा हसनैन तक पहुंचते हैं. एजेंसियां अब राणा हसनैन के पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से कथित संबंधों की बारीकी से जांच कर रही हैं.जांच में यह गंभीर आशंका जताई जा रही है कि ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए युवाओं को पहले कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेला जा रहा था और बाद में उन्हें अपने ही इलाके में अशांति व अराजकता फैलाने के लिए उकसाने की कोशिश की जा रही थी.
इलाके में 'स्लीपर सेल' बनाने की थी बड़ी साजिश
सुरक्षा एजेंसियों को यह भी तगड़ा अंदेशा है कि गिरफ्तार दोनों युवकों के माध्यम से सीमावर्ती इलाके के कई अन्य भोले-भाले युवाओं को भी इस जाल में फंसाकर एक 'स्लीपर सेल' तैयार करने की योजना थी. पकड़े गए युवकों के व्हाट्सऐप चैट, इंस्टाग्राम संपर्क और मोबाइल में मौजूद अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और स्थानीय व बाहरी नाम सामने आ सकते हैं.
गुजरात में करते थे मजदूरी, गांव लौटते ही पुलिस ने दबोचा
मिली जानकारी के अनुसार, दोनों युवक पहले गुजरात में एक जड़ी कारखाने में मजदूरी का काम करते थे. मुहर्रम के त्योहार के मौके पर वे अपने गांव लौटे थे, जिसके बाद वे कुछ दिनों के लिए आरा भी गए थे. वहां ठेकेदार से किसी बात को लेकर विवाद होने के बाद वे वापस अपने गांव लौटे और इसी दौरान खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने उन्हें धर दबोचा. दूसरी तरफ, युवकों के परिजनों का दावा है कि दोनों काफी कम पढ़े-लिखे हैं और सिर्फ मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, उन्हें फंसाया गया है.इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद टकोर गांव में पूरी तरह हड़कंप मचा हुआ है. ग्रामीण इस बात से बेहद हैरान हैं कि सीधे-सादे दिखने वाले ये युवक इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संपर्क में कैसे आ गए. फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों की पूरी नजर मोबाइल डेटा और डिजिटल कनेक्शन को खंगालने पर टिकी है. माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं.
