Sitamarhi News: संभावित बाढ़ और सुखाड़ जनित आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. गुरुवार को सीतामढ़ी समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) में प्रभारी सचिव सह उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई. बैठक में प्रभारी सचिव ने स्पष्ट लहजे में कहा कि आपदा की स्थिति में लापरवाही या शिथिलता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कार्यों में कोताही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय है.
आपदा संपूर्ति पोर्टल होगा अपडेट
प्रभारी सचिव राजीव रौशन ने बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर पॉइंट वाइज कई अहम निर्देश जारी किए हैं:
- राहत राशि वितरण: संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची अभी से एडवांस में तैयार करने को कहा गया है, ताकि समय पर अनुदान राशि बांटी जा सके. इसके लिए आपदा संपूर्ति पोर्टल को तुरंत अपडेट करने का आदेश दिया गया है.
- बचाव उपकरणों में इजाफा: बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए लाइफ जैकेट एवं नावों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का निर्देश दिया गया है.
- कम्युनिटी किचन और आश्रय स्थल: प्रभावित लोगों के लिए आवश्यकतानुसार सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) और आश्रय स्थलों की संख्या बढ़ाने को कहा गया है. इन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, बिजली और चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था रहेगी.
तटबंधों की चौबीस घंटे निगरानी और आपसी समन्वय
बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए जल संसाधन और आपदा प्रबंधन विभाग को विशेष हिदायत दी गई है:
- संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण: जिले के सभी प्रमुख तटबंधों (बांधों) की सुरक्षा और सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है. संवेदनशील स्थलों का नियमित निरीक्षण होगा और किसी भी क्षति पर तुरंत रिपेयरिंग शुरू की जाएगी.
- विभागीय तालमेल: निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखने के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय (कोऑर्डिनेशन) के साथ काम करने का निर्देश दिया गया है.
सुखाड़ व हीटवेव से निपटने का मास्टर प्लान
संभावित सुखाड़ और भीषण गर्मी (हीटवेव) से आमजन और पशुओं को बचाने के लिए भी जिला प्रशासन ने मुस्तैदी बढ़ा दी है. प्रभारी सचिव ने पेयजल संकट को दूर करने के लिए पीएचईडी और लघु जल संसाधन विभाग को कड़े टास्क सौंपे हैं.
नल-जल योजना और नलकूपों को लेकर सख्त निर्देश
- 15 जून की डेडलाइन: जिले के छूटे हुए 716 टोलों में आगामी 15 जून तक हर हाल में नल-जल योजना का कार्य पूर्ण करने का निर्देश पीएचईडी (PHED) को दिया गया है.
- अकार्यरत नलकूप होंगे चालू: लघु जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया गया है कि क्षेत्र के सभी बंद पड़े और खराब नलकूपों (बोरिंग) को शीघ्र चालू कराया जाए.
- वाटर लेवल की मॉनिटरिंग: विभिन्न प्रखंडों में भूजल स्तर (Water Level) की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी. इसके साथ ही नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है.
